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Tuesday, 7 April 2020

Atal Ji Ki Kavita ( अटल जी की कविताएँ )

Atal Ji Ki Kavita ( अटल जी की कविताएँ ) 

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आओ फिर से दिया जलाएँ -
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ

हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ


दुनिया का इतिहास पूछता -
दुनिया का इतिहास पूछता,
रोम कहाँ, यूनान कहाँ?
घर-घर में शुभ अग्नि जलाता।
वह उन्नत ईरान कहाँ है?

दीप बुझे पश्चिमी गगन के,
व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा,
किन्तु चीर कर तम की छाती,
चमका हिन्दुस्तान हमारा।

शत-शत आघातों को सहकर,
जीवित हिन्दुस्तान हमारा।
जग के मस्तक पर रोली सा,
शोभित हिन्दुस्तान हमारा।


जो बरसों तक सड़े जेल में, उनकी याद करें -
जो बरसों तक सड़े जेल में, उनकी याद करें।
जो फाँसी पर चढ़े खेल में, उनकी याद करें।

याद करें काला पानी को,
अंग्रेजों की मनमानी को,

कोल्हू में जुट तेल पेरते,
सावरकर से बलिदानी को।

याद करें बहरे शासन को,
बम से थर्राते आसन को,

भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू
के आत्मोत्सर्ग पावन को।

अन्यायी से लड़े,
दया की मत फरियाद करें।

उनकी याद करें।
बलिदानों की बेला आई,

लोकतंत्र दे रहा दुहाई,
स्वाभिमान से वही जियेगा

जिससे कीमत गई चुकाई
मुक्ति माँगती शक्ति संगठित,

युक्ति सुसंगत, भक्ति अकम्पित,
कृति तेजस्वी, घृति हिमगिरि-सी

मुक्ति माँगती गति अप्रतिहत।
अंतिम विजय सुनिश्चित, पथ में

क्यों अवसाद करें?
उनकी याद करें।


Friday, 25 October 2019

Diwali Poem in Hindi ( छुर-छुरिया )

Diwali Poem in Hindi : कहीं छु छु करती छुछुरिया

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Diwali Poem in Hindi

दीपावली पर कविता ( Diwali Poem in Hindi ) :.:



कहीं छुर-छुर करती छुर-छुरिया
कहीं चट-पट फटते पटाके रे
कहीं चुट-पुट करती चुटपुटिया
कहीं ना बचे अब सन्नाटे रे


मिट गया अंधियरा यारा
मिट गये सन्नाटे रे
शुरू हो गया हो जैसे
मस्ती सैर सपाटे रे


कोई छोडे छुर छुरिया
तो कोई मुर्गाछाप पटाके रे
कोई बजावे चुट-पुटिया 
तो कोई रॉकेट के फ़वारे रे


कहीं रंगो से सजी रंगोली
तो कहीं दिपों का माला रे
कहीं दोस्तो की है दोस्ती
तो कहीं बड़ो का बचपना रे


सारे मुसाफिर घर को आये
घर ही सबका ठिकाना रे
मिट गई है दूरी सबकी
मिलता यार याराना रे


रोशनी का त्यौहार दिवाली
सब मिलकर साथ मनाना रे
खत्म हो जाएगा अंधियारा
बस मिलकर दीप जलाना रे
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MORE   - RAKSHA BANDHAN POEM IN HINDI
Poet-
Kishan
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Saturday, 19 October 2019

यादो की बारात || Love Poem For Lovers In Hindi

यादो की बारात || Love Poem For Lovers In Hindi

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अभी तो बाकी वो सुबह वह साम है
जिसपे लिखे तेरे - मेरे नाम है
मिल जा तु कही किसी मोड पे
मेरे दिल  मे बस यही अरमान है

तुझको कैसे बताऊँ तुझमे बसी मेरी जान है
तेरे बिना न कोई मेरा जहान है
तुझको बता दूँ तु कितनी अंजान है
तेरे  लिए मेरी तो जां भी कुरबान है

तेरे बिना न मेरी पहचान है
तेरे बिना हर रास्ते सुनसान है
तेरे बिना तो मेरी जिंदगी वीरान है
फिर भी तू न जाने क्यों मेरे दर्द से अंजान है

अभी तो बाकी वो लम्हे वो एहसास है
जिसमे बीतता हर लमहा वक्त का तुम्हारे साथ है
छोड़ देना न तुम साथ मेरा
तुम्हारे बिना यह जिंदगी उदास है

क्यों न आती अब  वो सुबह-साम है
माना अभी तो वो सुबह साम नही है
फिर भी मेरे लिए तु आम नही है
बुझ जाये जो मेरे लिए तु वो अरमान नही है

क्यो न आती अब वो सुबह-साम है
जिसपल तेरी नयनो में ही मेरा स्थान है
जिस पल तेरी  निगाहे ही मेरी पहचान है
मिल जा तु कही किसी मोड़ पे बस यही अरमान है 

माना अभी  तो वो सुबह साम नही है
फिर भी तेरे सिवा मेरे होठो पर कोई नाम नही है
अब तो असक को भी विराम नही है, नयनो मे कोई स्थान नही है
माना अभी तो वो सुबह वो साम नही है



Poet-
Kishan
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Sunday, 22 September 2019

Top Best Motivational Poem in Hindi ( हिन्दी कविता )

Top Best Motivational Poem in Hindi ( हिन्दी कविता )

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Top Best Motivational Poem in Hindi

पिता की दी सीखो का करले ध्यान
निर्णय लेना भी सिख जाएगा
पिता तेरे लिए वो जमीं है
जिसपर हमेशा तु खुद को खड़ा पाएगा

आज नही तो कल ये तु जान जाएगा
पिता के सिख से बढ़कर कोई सिख नही होती
पिता के होने से बढ़कर कोई तक़दीर नही होती
पिता के न होने से बढ़कर कोई पीर नही होती

माँ के दी सीखो का करले ध्यान
खुद पर विश्वास करना तु सिख जाएगा
माँ तो तेरे लिए वो दरवाजा है
जिसे तु हमेशा खुला पाएगा

आज नही तो कल तु ये जान जाएगा
माँ से बढ़कर कोई चीज नही होती
माँ से अच्छी कोई तस्वीर नही होती
माँ के होने से बड़कर कोई तकदीर नही होती

कोहरा चाहे कितना भी घना हो
सूरज के गर्मी से हट जाता है
अंधेरा चाहे कितना भी घना हो
सुबह के रोसनी के आगे न टिक पाता है  

भ्रम चाहे कितना भी बड़ा हो
खुद पर विश्वास से मिट जाएगा
अज्ञान चाहे कितना भी ज्यादा हो
गुरु के ज्ञान के आगे न टिक पायेगा

तु खुद को पहचान जाएगा
आज नही तो कल तु ये मान जाएगा
आदत चाहे कितनी भी बुरी हो
दृढ़ विश्वास से छुट जाएगा
रात चाहे कितनी भी लम्बी हो
कल सवेरा फिर आएगा
आज नही तो कल तु ये मान जाएगा
तु खुद को पहचान जाएगा

MORE   -SELF RESPECT POEM IN HINDI 




















Friday, 30 August 2019

Sad Poem In Hindi ( काश तुम मेरे पास होती )

Sad Poem In Hindi ( काश तुम मेरे पास होती )    

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काश तुम मेरे पास होती
तो यू न जिंदगी उदास होती
यूँ  न चलते अकेले अंतहीन रास्तो पर
तो यूँ न खो देता एहसास जिंदगी का

काश तुम मेरे पास होती
तो यू न जिंदगी उदास होती
तो यूँ न अश्क पलकों से जुदा होते
तो यूँ न हम रह रह के पलकें भिगोते

काश तुम मेरे पास होती
तो यू न जिंदगी उदास होती
ख्वाब तो अभी भी आते है पर
ख्वाबों में भी अब तुम साथ नहीं होती

बस तेरी यादों का सहारा है 
फिर भी तु ही सबसे प्यारा है 
काश तुम मेरे पास होती
तो यू न जिंदगी उदास होती


 Sad Poem In Hindi यह  कविता आपको  कैसी लगी प्लीज हमें कमेंट करके बताएं!

        धन्यवाद 🙏🙏🙏


poet

    शोध छात्र
        शिव कुमार खरवार 
     राजनीतिक विज्ञान विभाग
डॉ.भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी
               लखनऊ ।
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Tuesday, 27 August 2019

Mother Poem in Hindi ( मां की ममता )

Mother Poem in Hindi ( माँ की ममता )


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Mother Poem in Hindi


 माँ...आज जो कुछ भी हूं सब तेरी वजह से  हूं!  
भूखे रहकर भी  निवाला खिलाया तूने
 धूप के आने पर छांव बनकर सहलाया तूने
, अनजान राहो में कांटों के बीच फूल बनकर 
खिलना सिखाया तूने
दुख के काले बादली में धीरज दिलाया तूने

 माँ...आज जो कुछ भी हूं सब तेरी वजह से हूं! 
जब मै पहली बार चला था 
 कभी गिरता था कभी समहला था
 पैरों पर खड़ा होकर चलना सिखाया तूने
खुद पर यंकिन करना सिखाया तूने

माँ...आज जो कुछ भी हूं सब तेरी वजह से हूं!
पैरों के नीचे जमीन
सिर के ऊपर छांव बनी
तुफानो से लड़ने को चटटान बनी
कभी मिट ना सके मेरे लिए वह सम्मान बनी

माँ...आज जो कुछ भी हूं सब तेरी वजह से हूं!
 जाने कितने रूप लेके मुझे बचाया तूने 
सबसे पहले प्यास बुझाया तूने
सबसे पहले  भूख मिटाया तूने
सबसे पहले  प्यार जताया तूने

माँ...आज जो कुछ भी हूं सब तेरी वजह से हूं!
कृति तारों कि भांति 
आकाश मे छा जाएगी
कृति दीपक कि भांति
राह दिखाएगी
मां तुमने जो दिए संस्कार 
वादा  है वह लोगों को भा जाएगी

माँ...आज जो कुछ भी हूं सब तेरी वजह से हूं!



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        धन्यवाद 🙏🙏🙏
      शोध छात्र
        शिव कुमार खरवार 
     राजनीतिक विज्ञान विभाग
डॉ.भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी
               लखनऊ ।  

Love Poem in Hindi (एक वादा )

Love Poem in Hindi ( एक वादा )

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Love Poem in Hindi

 तु चाहे न चाहे मैं तुझे ही चाहूँगा । 
 मैंने तुमको चाहा है और तुम्हे ही चाहूँगा।। 
 तेरे लिए जागूँगा और तुझे ही गुनगुनाऊँगा। 
 तू न मिली तो क्या हुआ तेरी यादो का घर बनाऊंगा।। 

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तु चाहे न चाहे मैं तुझे ही चाहूँगा । 
 तेरी मुझपर पड़ी एक नजर का क़र्ज़ मैं कैसे चुकाऊंगा।   

 कुछ न कह सका तुमसे पर तहे दिल से कहना चाहूँगा।। 
 तुम मेरी तो न बन सकी पर तेरी यादो पे हक़ जमाउंगा।
वादा है तुमसे तेरे सिवा किसी और को न चाहूँगा।। 


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तु चाहे न चाहे मैं तुझे  ही चाहूँगा । 

 दर्द इतना बढ़गया है की लिखता जाऊंगा। 
 इस दर्द को ही अपनी ताकत  बनालूँगा।। 
 तेरी चाहत को अपनी राहत  बनालूँगा। 
 चाहे जैसे भी हो तेरा साथ निभा लूँगा।। 


तु चाहे न चाहे मैं तुझे  ही चाहूँगा ।  
तेरे पलकों के आंसू मेरे पलकों से बहे।                    
 तेरी ह्रदय की चीख मेरे ह्रदय से निकले ।। 
 तेरी आँखों से सारा जहा नजर आये। 
 पर मेरे आँखों से बस तू नजर आये ।। 

तु चाहे न चाहे मैं तुझे  ही चाहूँगा । 
 कुछ टूट रहा है अंदर  ही अंदर ।
 बता तेरे बिना आखिर मै कैसे रह पाऊंगा।। 
 पर तेरे बिना भी जीकर दिखाऊंगा ।
 प्यार का एक अलग ही अंदाज दिखाऊंगा।। 




 तू चाहे न चाहे पर मै तुम्हे चाहूँगा सदा ।।। 

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Love Poem Written by- Kishan Kumar

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        धन्यवाद 🙏🙏🙏

Sunday, 25 August 2019

Raksha Bandhan Poem in Hindi ( रक्षा-बंधन )

Raksha Bandhan Poem in Hindi ( रक्षा-बंधन )

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भाई तु हि तो हिम्मत है मेरी 
तु ही तो ताकत है !
भाई ये दोनों आँखे मेरी
तुझको ही ताकत है !! 

तु हि तो संघी मेरा तु ही तो साथी है !
तु हि तो घोडा मेरा तु ही तो हाथी है !!

बेहना तु ही तो कमजोरी मेरी 
तु हि मेरी सरारत है!
बेहना ये दोनों आखे मेरी 
तुझको ही चाहत है !!

तु हि गुडिया मुझको बच्चपन से प्यारी है !
तु तो जीवन मेरा तु ही जिम्मेदारी है !!

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        धन्यवाद 🙏🙏🙏

  Poet   

शोध छात्र
        शिव कुमार खरवार 
     राजनीतिक विज्ञान विभाग
डॉ.भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी
               लखनऊ । 
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Self Respect Poem in Hindi || आत्मविश्वास

 Self Respect Poem in Hindi || आत्मसम्मान 

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 Self Respect Poem in Hindi

उठजा खुद से रूह ब रूह करले
मत रोक खुद को खुद से गुफ्तह गु करले
देख सदियाँ बीत गई
देख अपने थे जो वो भी छुट गये
देख सपने थे जो वो भी टूट गये
देख प्यार किया था जिससे वो भी रूठ गये
उठजा खुद से रूह ब रूह करले
मत रोक खुद को खुद से गुफ्तह गु करले
क्या है जो छुटना अभी भी बाकी है
आखिर तु किस भ्रम में  पड़ा है
जो खुद से इतना दूर खड़ा है
मत तोल खुद को भ्रम की तरज़ू मे
कुछ तो खुद पर यकीं करले
उठजा खुद से रूह ब रूह करले
मत रोक खुद को खुद से गुफ्तह गु करले


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        धन्यवाद 🙏🙏🙏

  Poet   

शोध छात्र
        शिव कुमार खरवार 
     राजनीतिक विज्ञान विभाग
डॉ.भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी
               लखनऊ ।  

मुझे लौटा दो || love poetry in hindi

मुझे लौटा दो 

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मुझे लौटा दो ।
वो मासुम सी आंखे 
वो आखों कीसरारत
वो प्यार  भरे पल 
मुझे लौटा दो ।
वो चेहरे पर गुस्सा 
पर आंखों में प्यार 
मुझपर चिल्लाना 
मुझे लौटा दो ।।
वो आंखों में आशा 
वो मन मे विश्वास 
वो बातो में मिठास 
मुझे लौटा दो ।।।
वो मासुम सी बातें 
वो मिलने की चाहत 
वो सम्मान एक दूजे का 
मुझे लौटा दो ।।।।

Friday, 23 August 2019

Motivational Poem in Hindi for Student ( कविता )

Motivational Poem in Hindi for Student( छात्रों के लिए सुन्दर कविता )

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एक रोज आखिर पुस्तकालय मुझसे बोल पड़ा 
क्या  हुआ तुझे जो स्तंभित और अशांत इधर उधर डोल रहा 
न भूवन पर आधी आयी और न ही  बादल गर्जनाकर कुछ बोल रहा 
तो फिर क्यो चिर संतृप्त हो तू इधर उधर तु देख  रहा।।

 आ बैठ मेरे अघोष में 
मैं तुझे समझाता हूँ
तेरे बेचैन मन को 
 शांत करने का उपाय सुझाता हूँ
           
   जहाँ  सुख भी और दुख भी  है
  जय भी  और पराजय भी है 
  मान भी और अपमान भी है
     और जिंदगी जीने का ज्ञान भी है ।।।

आ खोजले जो कुछ तुझे पाना है 
कर खुद से वादा मुझमे डूब जाना है 
मुझे तो तेरा हर हाल में साथ निभाना है 
     तुझे ही बस खुद को आजमाना है    

मै तो तेरे लिए वो सिख हूँ
की जैसे सहस्त्र ह्रदय की चीख हूँ
  तु अकेला नहीं है जिसे मै सिखाता हूँ
तेरे जैसे अनेको भटके पथिको को राह दिखता हूँ

   
    कुंजी है पुस्तकालय तेरा  
   उसे पढ़ विश्लेषण कर ज़रा 
     यही पर है हर उलझनों का समाधान तेरा ।  


      शोध छात्र
        शिव कुमार खरवार 
     राजनीतिक विज्ञान विभाग
डॉ.भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी
               लखनऊ ।  

Saturday, 17 August 2019

Best Motivational Poem in Hindi || मंगल मिशन

Best Motivational Poem in Hindi || Mangal Abhiyan Poem in Hindi  


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मत रोक मुझे
मैं एक परिंदा हूँ
उड़ना मेरी फितरत है
इसलिए अभी तक जिंदा हूँ।

हा मै एक परिंदा हूँ

हक है आसमा पर
तो हक जमाता हूँ
उड़ने की है हिम्मत
तो खुद को आजमाता हूँ

जमीन पर तो पल भर का डेरा है
वरना खुले गगन में ही अपना बसेरा है
अभी तो डाल डाल पात पात खाख खाख छानना बाकि है
खुले गगन में क्या कहा है हर बात जानना बाकि है

मै हूँ परिंदा मंगल यान है जिसका नाम
मंगल की जमीन पर तिरंगा फहराना जिसका काम
वदा है दुर छितिज से सन्देश ले आऊंगा
मानव तेरे लिए एक जमीन एक देश ले आऊंगा

न रोको मुझे मै एक परिंदा हूँ
मै हूँ भारत के मंगल अभियान का मंगल यान
न रोक पाएंगा अंधी मुझे न रोक पाएंगा तूफान
चीरती हुए हवाओ में मै भरुंगा उड़ान

जय हो मंगल यान.......
जय हो मंगल यान.......

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