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हिन्दी कविता || Top Best Motivational Poem in Hindi

हिन्दी कविता || Top Best Motivational Poem in Hindi
पिता की दी सीखो का करले ध्यान
निर्णय लेना भी सिख जाएगा
पिता तेरे लिए वो जमीं है
जिसपर हमेशा तु खुद को खड़ा पाएगा

आज नही तो कल ये तु जान जाएगा
पिता के सिख से बढ़कर कोई सिख नही होती
पिता के होने से बढ़कर कोई तक़दीर नही होती
पिता के न होने से बढ़कर कोई पीर नही होती

माँ के दी सीखो का करले ध्यान
खुद पर विश्वास करना तु सिख जाएगा
माँ तो तेरे लिए वो दरवाजा है
जिसे तु हमेशा खुला पाएगा

आज नही तो कल तु ये जान जाएगा
माँ से बढ़कर कोई चीज नही होती
माँ से अच्छी कोई तस्वीर नही होती
माँ के होने से बड़कर कोई तकदीर नही होती

कोहरा चाहे कितना भी घना हो
सूरज के गर्मी से हट जाता है
अंधेरा चाहे कितना भी घना हो
सुबह के रोसनी के आगे न टिक पाता है  

भ्रम चाहे कितना भी बड़ा हो
खुद पर विश्वास से मिट जाएगा
अज्ञान चाहे कितना भी ज्यादा हो
गुरु के ज्ञान के आगे न टिक पायेगा

तु खुद को पहचान जाएगा
आज नही तो कल तु ये मान जाएगा
आदत चाहे कितनी भी बुरी हो
दृढ़ विश्वास से छुट जाएगा
रात चाहे कितनी भी लम्बी हो
कल सवेरा फिर आएगा
आज नही तो कल तु ये मान जाएगा
तु खुद को पहचान जाएगा

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एक रोज आखिर पुस्तकालय मुझसे बोल पड़ा || Motivational Poem in Hindi for Student

एक रोज आखिर पुस्तकालय मुझसे बोल पड़ा || Motivational Poem in Hindi for Student 
एक रोज आखिर पुस्तकालय मुझसे बोल पड़ा  क्या  हुआ तुझे जो स्तंभित और अशांत इधर उधर डोल रहा  न भूवन पर आधी आयी और न ही  बादल गर्जनाकर कुछ बोल रहा  तो फिर क्यो चिर संतृप्त हो तू इधर उधर तु देख  रहा।।

 आ बैठ मेरे अघोष में  मैं तुझे समझाता हूँ
तेरे बेचैन मन को   शांत करने का उपाय सुझाता हूँ    जहाँ  सुख भी और दुख भी  है   जय भी  और पराजय भी है   मान भी और अपमान भी है
     और जिंदगी जीने का ज्ञान भी है ।।।

आ खोजले जो कुछ तुझे पाना है 
कर खुद से वादा मुझमे डूब जाना है 
मुझे तो तेरा हर हाल में साथ निभाना है 
     तुझे ही बस खुद को आजमाना है    

मै तो तेरे लिए वो सिख हूँ
की जैसे सहस्त्र ह्रदय की चीख हूँ
 तु अकेला नहीं है जिसे मै सिखाता हूँ
तेरे जैसे अनेको भटके पथिको को राह दिखता हूँ


    कुंजी है पुस्तकालय तेरा      उसे पढ़ विश्लेषण कर ज़रा       यही पर है हर उलझनों का समाधान तेरा ।  
MORE   -MOTIVATIONAL POEMSELF RESPECT POEM       शोध छात्र         शिव कुमार खरवार       राजनीतिक विज्ञान विभाग डॉ.भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी                लखनऊ । 

मंगल मिशन || Best Motivational Poem in Hindi

मंगल मिशन || Best Motivational Poem in Hindi
मत रोक मुझे
मैं एक परिंदा हूँ
उड़ना मेरी फितरत है
इसलिए अभी तक जिंदा हूँ।

हा मै एक परिंदा हूँ

हक है आसमा पर
तो हक जमाता हूँ
उड़ने की है हिम्मत
तो खुद को आजमाता हूँ

जमीन पर तो पल भर का डेरा है
वरना खुले गगन में ही अपना बसेरा है
अभी तो डाल डाल पात पात खाख खाख छानना बाकि है
खुले गगन में क्या कहा है हर बात जानना बाकि है

मै हूँ परिंदा मंगल यान है जिसका नाम
मंगल की जमीन पर तिरंगा फहराना जिसका काम
वदा है दुर छितिज से सन्देश ले आऊंगा
मानव तेरे लिए एक जमीन एक देश ले आऊंगा

न रोको मुझे मै एक परिंदा हूँ
मै हूँ भारत के मंगल अभियान का मंगल यान
न रोक पाएंगा अंधी मुझे न रोक पाएंगा तूफान
चीरती हुए हवाओ में मै भरुंगा उड़ान

जय हो मंगल यान.......
जय हो मंगल यान.......
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