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Diwali Poem in Hindi ( छुर-छुरिया )

Diwali Poem in Hindi : कहीं छु छु करती छुछुरिया
दीपावली पर कविता ( Diwali Poem in Hindi ) :.:

कहीं छुर-छुर करती छुर-छुरिया
कहीं चट-पट फटते पटाके रे
कहीं चुट-पुट करती चुटपुटिया
कहीं ना बचे अब सन्नाटे रे


मिट गया अंधियरा यारा
मिट गये सन्नाटे रे
शुरू हो गया हो जैसे
मस्ती सैर सपाटे रे


कोई छोडे छुर छुरिया
तो कोई मुर्गाछाप पटाके रे
कोई बजावे चुट-पुटिया 
तो कोई रॉकेट के फ़वारे रे


कहीं रंगो से सजी रंगोली
तो कहीं दिपों का माला रे
कहीं दोस्तो की है दोस्ती
तो कहीं बड़ो का बचपना रे


सारे मुसाफिर घर को आये
घर ही सबका ठिकाना रे
मिट गई है दूरी सबकी
मिलता यार याराना रे


रोशनी का त्यौहार दिवाली
सब मिलकर साथ मनाना रे
खत्म हो जाएगा अंधियारा
बस मिलकर दीप जलाना रे
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MORE   - RAKSHA BANDHAN POEM IN HINDI
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Raksha Bandhan Poem in Hindi ( रक्षा-बंधन )

Raksha Bandhan Poem in Hindi ( रक्षा-बंधन )
भाई तु हि तो हिम्मत है मेरी  तु ही तो ताकत है ! भाई ये दोनों आँखे मेरी तुझको ही ताकत है !! 
तु हि तो संघी मेरा तु ही तो साथी है ! तु हि तो घोडा मेरा तु ही तो हाथी है !!
बेहना तु ही तो कमजोरी मेरी  तु हि मेरी सरारत है! बेहना ये दोनों आखे मेरी  तुझको ही चाहत है !!
तु हि गुडिया मुझको बच्चपन से प्यारी है ! तु तो जीवन मेरा तु ही जिम्मेदारी है !!

Raksha Bandhan Poem in Hindi नामक यह  कविता आपको  कैसी लगी प्लीज हमें कमेंट करके बताएं!
        धन्यवाद 🙏🙏🙏   Poetशोध छात्र         शिव कुमार खरवार       राजनीतिक विज्ञान विभाग डॉ.भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी                लखनऊ । 
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