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रविंद्रनाथ टैगोर की जीवनी हिंदी | Rabindranath Tagore In Hindi

नमस्कार मित्रों देवकलासंसार में आपका स्वागत है , आपने अब तक कई महान व्यक्तित्व के जीवन परिचय पढ़े होगे , जिन्होंने देश के लिए , समाज के उद्धार के लिए अनगिनत कार्य किये होगे आज हम  आपको ऐसे ही एक शख्स के बारे में बताने वाले है , 

जो एक महान लेखक , कहानीकार , उपन्यासकार , गीतकार ,साहित्य प्रेमी थे , इन्होने न केवल साहित्य के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण  योगदान दिया है बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आजाव उठाई है तथापि  भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के  सक्रिय कार्यकर्त्ता भी रहे है | 

हम बात करने वाले है रविंद्रनाथ टैगोर के बारे , कुछ याद तो जरुर आ रहा  होगा , आपने कई स्कूलों , गणतंत्र दिवस , सिनेमा घरो एवं टेलीविजन पर इसे जरुर सूना होगा ,हाँ आप ठीक सोच रहे है हम बात कर रहे है  "जन गण मन गण " की  हाँ आपने ठीक पहचाना  रविंद्रनाथ टैगोर   द्वारा रचित  यह रचना   भारत देश का राष्ट्रीयगान बना  , यह एकलौते मात्र ऐसे गैरयूरोपीय  शख्स  एवं एशिया के पहले शख्स थे जिन्हें सर्वप्रथम  गीतांजलि  नामक काव्यसंग्रह/ कविता संग्रह के लिए   नोबोल पुरस्कार से सम्मानित किया गया |

rabindranath tagore in hindi

भारत की धरती ने  अनेक वीर सपूतो , कवियो , साहित्य प्रेमियों , कहानीकारो ,गीतकार , उपन्यासकार , दार्शनिको को जन्म दिया  जिसकी श्रृखला काफी लम्बी है , नाम  गिनना यदि शुरू किया गया तो  सम्भवतः जुबान थक जाए , उन्ही महान साहित्यकार ,काव्यप्रेमी , दार्शनिक में से एक रविंद्रनाथ टैगोर थे , जिन्होंने अपनी जीवन के अमूल पल भारत माता की सेवा में न केवल  समर्पित किये बल्कि वे  भारतीय स्वतत्रता संग्राम के सक्रीय नेता भी रहे |

इनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इसको नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया यही नही  यह भारत के प्रथम ऐसे नागरिक थे ,जिनको  यह पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ | अपने आप में किसी भी भारतीय के लिए  उपलब्धि  थी | इस  प्रकार , ये  प्रथम भारतीय नागरिक बने जिन्होंने एशिया क्षेत्र से यह पुरस्कार प्राप्त किया तथापि  इसके साथ ही  ये  प्रथम गैर यूपोरिय महाद्धीप के नोबल पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता भी बन गए | 

रविंद्रनाथ टैगोर का प्रारम्भिक जीवन  - 

दिनांक  7 मई  वर्ष 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी  में  जन्मे रविंद्रनाथ टैगोर  एक महान कवि , गीतकार  , उपन्यासकार , दार्शनिक थे | इनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर तथा  इनकी  माता  का नाम  शारदा देवी था | 

भारतीय इतिहास में लोग इन्हें गुरुदेव के नाम से भी जानते है | यह अपने पिता के सबसे छोटे पुत्र थे तथापि यह ब्रम्ह समाज के प्रमुख नेताओं में से एक थे , जो 19 शताब्दी के इतिहास का प्रमुख सम्प्रदाय बना | जिसने हिन्दू धर्म में व्याप्त कुरीतियों का पर प्रश्न भी लगाया जिसके माध्यम से इन्होने समाज में व्याप्त कुरीतियों  पर प्रहार करने का कार्य किया |


शैक्षणिक जीवन  -

रविंद्रनाथ टैगोर  की प्रारम्भिक शिक्षा सेट जूनियर स्कूल से हुई तथापि आगे की शिक्षा के लिए मात्र 17 वर्ष की आयु में यह इंग्लैण्ड चले गए , जहाँ से इन्होने कानून की शिक्षा प्राप्त की किन्तु शिक्षा का कार्य बीच में छोड़कर वापस देश लौट आये |


वैवाहिक जीवन   - 

22 वर्ष की अवस्था में  रविंद्रनाथ टैगोर  का विवाह मृणालिनी देवी नामक एक कन्या से कर दिया गया  , जिनसे इनको 5 संतानों की प्राप्ति हुई थी | मृणालिनी देवी सरल एवं सुबोध कन्या थे जिन्होंने सच्चे अर्थो में रविंद्रनाथ टैगोर   का जीवन पर्यन्त  साथ दिया |


साहित्य में योगदान  - 

वैसे देखा जाए तो , रविंद्रनाथ टैगोर  बहुमुखी प्रतिभा के धनि व्यक्ति थे , इन्होने साहित्य के क्षेत्र में  विविध कविताएँ ,आत्मकथा , उपन्यास , संगीता , निबन्ध , लघु कथाएँ , कहानीयां  लिख कर अपना महत्वपूर्ण योगदान किया ,जिससे  साहित्य के क्षेत्र में श्री वृद्धि हुई | 

उन्होंने अपने जीवनकाल में  तकरीबन  2230 गीतों का रचना करने का कार्य किया |इसके अलावा इन्होने ढ़ेरो  कविताएँ ,आत्मकथा , उपन्यास , संगीता , निबन्ध , लघु कथाएँ , कहानीयां  जो निम्नवत  -


उपन्यास  

कहानी संग्रह

नाटक

कविता 

नष्टनीड़

छेलेबेला

विसर्जन

गीतांजलि

घरे बाइरे

संस्मरण

अचलायतन

सोनार तरी

गोरा 

जीवनस्मृति


मुक्तधारा 

 


पदावली


योगायोग 

गल्पगुच्छ

रक्तकरवी

भानुसिंह ठाकुरेर

चोखेर बाली

रूस के पत्र 

राजा

मानसी



वाल्मीकि प्रतिभा

वलाका



डाकघर

गीतिमाल्य


रविंद्रनाथ टैगोर की प्रमुख रचनाएं  - 


गोरा 

नई रोशनी यह स्वतन्त्रता/घर वापसी 
अनमोल भेंट/मुन्ने की वापसी  भिखारिन पिंजर 
अनाथ पाषाणीप्रेम का मूल्य 
अनाधिकार प्रवेश  कवि और कविता पत्नी का पत्र 
अपरिचिताकवि का हृदय  काबुलीवाला 
अवगुंठन 
  
संपादक

अतिथि 
अन्तिम प्यार कंचन खोया हुआ मोती 
इच्छापूर्ण/इच्छा पूर्ति गूंगीजीवित और मृत
फूल का मूल्य तोता धन की भेंट
संकट तृण का  पड़ोसिनएक छोटी पुरानी कहानी
समाज का शिकार गिन्नीी सीमान्त 
मुसलमानी की कहानी विदा एक रात 
आधी रात में पोस्टमास्टरविद्रोही 


हमे आपको बताते हुए हर्ष हो रहा है कि रविंद्रनाथ टैगोर ही , वे पहले भारतीय थे , जिनको नोबोल पुरस्कार से सम्मानित किया गया और यह ही एक मात्र ऐसे कवि भी बने , जिनकी रचनाएं भारत एवं बांग्लादेश के राष्ट्रीयगान बनी  , जो इस प्रकार है  - 


         भारत का राष्ट्रगान

जन गण मन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता


पंजाब सिंधु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंगा


बिंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंगा


तब शुभ नामें जागे तब शुभ आशीष माँगे


गाहे तब जयगाथा।


जन गण मनअधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता


जय हे जय हे जय हे जय जय जय जय हे

                                          

                       बांग्लादेश का राष्ट्रगान
 

1. बांग्ला लिपि में


আমার সোনার বাংলা

আমার সোনার বাংলা,

আমি তোমায় ভালবাসি।

চিরদিন তোমার আকাশ,

তোমার বাতাস,

আমার প্রাণে বাজায় বাঁশি।

ও মা,

ফাগুনে তোর আমের বনে,

ঘ্রাণে পাগল করে,

মরি হায়, হায় রে,

ও মা,

অঘ্রানে তোর ভরা খেতে,

আমি কি দেখেছি মধুর হাসি।

কি শোভা কি ছায়া গো,

কি স্নেহ কি মায়া গো,

কি আঁচল বিছায়েছ,

বটের মূলে,

নদীর কূলে কূলে।

মা, তোর মুখের বাণী,

আমার কানে লাগে,

সুধার মতো,

মরি হায়, হায় রে,

মা, তোর বদনখানি মলিন হলে,

আমি নয়ন জলে ভাসি।

2. हिन्दी अनुवाद

मेरा प्रिय बंगाल

मेरा सोने जैसा बंगाल,

मैं तुमसे प्यार करता हूँ.

सदैव तुम्हारा आकाश,

तुम्हारी वायु

मेरे प्राणों में बाँसुरी सी बजाती है।

ओ माँ,

वसंत में आम्रकुंज से आती सुगंध

मुझे खुशी से पागल करती है,

वाह, क्या आनंद!

ओ माँ,

आषाढ़ में पूरी तरह से फूले धान के खेत,

मैने मधुर मुस्कान को फैलते देखा है।

क्या शोभा, क्या छाया,

क्या स्नेह, क्या माया!

क्या आँचल बिछाया है

बरगद तले

नदी किनारे किनारे!

माँ, तेरे मुख की वाणी,

मेरे कानो को,

अमृत लगती है,

वाह, क्या आनंद!

मेरी माँ, यदि उदासी तुम्हारे चेहरे पर आती है,

मेरे नयन भी आँसुओं से भर आते हैं।

3. लिप्यंतरण

आमार शोनार बांग्ला

आमार शोनार बांग्ला,

आमि तोमाए भालोबाशी

चिरोदिन तोमार आकाश,

तोमार बताश,

अमार प्राने बजाए बाशी

ओ माँ,

फागुने तोर अमेर बोने

घ्राने पागल कोरे,

मोरी हए, हए रे,

ओ माँ,

ओघ्राने तोर भोरा खेते

अमी कि देखेछी मोधुर हाशी.

की शोभा, की छाया गो,

की स्नेहो, की माया गो,

की अचोल बिछाइछो,

बोतेर मूले,

नोदिर कूले कूले!

माँ, तोर मुखेर बानी

आमार काने लागे,

शुधार मोतो,

मोरी हए, हए रे,

माँ, तोर बोदोनखानी मोलीन होले,

आमि नोयन जोले भाशी.



नोबोल पुरस्कार से सम्मानित  - 

रविंद्रनाथ टैगोर ने साहित्य के क्षेत्र में ढ़ेरो रचनाएँ लिखी जिससे साहित्य के क्षेत्र में अद्धृतिय वृद्धि हुई   ,  इन्ही रचनाओं में से एक गीतांजलि भी शामिल है  , 

जिसके लिए  इन्हें  वर्ष  1913  नोबोल पुरस्कार से सम्म्मानित किया गया |जिसकी रचना रविंद्रनाथ टैगोर  के द्वारा वर्ष 1913 में की गई , जो मुख्यतः 113 कविताएँ शामिल है |


अथवा यह कह सकते है कि  गीतांजलि  113 कविताओं का संग्रह का नाम है |जिसके लिए रविंद्रनाथ टैगोर  को  नोबोल पुरस्कार से सम्मानित  किया गया | 


इसके अलावा इनको अन्य कई उपाधियाँ भी प्राप्त हुई जिनमे गुरुदेव भी एक प्रमुख है | तथापि  3 जून  वर्ष 1915  को  अग्रेजी हुकुमत राजा जार्ज  पंचम  के द्वारा  रविंद्रनाथ टैगोर को नाईटहुड की उपाधि से  सुशोभित किया गया 
किन्तु व 13 अप्रैल वर्ष 1919 में जलियांवाला अमृतसर में हुए भीषण नरसंहार से क्रुद्ध होकर रविंद्रनाथ टैगोर  ने इस उपाधि को वापस कर दिया था |

निधन  - 

7  अगस्त  1941 को महान साहित्यकार  रविंद्रनाथ टैगोर  ने अपने जीवन की अंतिम साँस ली | बतलाया जाता है कि जीवन के अंतिम पढ़ाव पर आकार  रविंद्रनाथ टैगोर के अंदर चित्रकारी एवं पेंटिंग की ललक जागी , उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय के कई चित्र रचनाएं भी की | 

देवाकलासंसर स्टाफ टीम की ओर से आप सभी को बहुत सारी शुभकामनाएं , यह  रविंद्रनाथ टैगोर के जीवनी पर आधारित यह आर्टिकल आपको कैसा लगा अथवा   रविंद्रनाथ टैगोर के बारे में दी गई जानकारी , आपको कैसी लगी | यदि आपके मन कोई सुझाव अथवा  सलाह  , इस लेख के पढ़ने के उपरांत आए  हो , तो आप अपने सुझाव  कमेंट बॉक्स में कॉमेट करके दे सकते है | आपके सुझाव अथवा प्रतिक्रियाए हमारे लिए मायने रखते है.. ..धन्यवाद्

  © देवाकला संसार

देवाकला संसार टीम  उत्तर प्रदेश , भारत 

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