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लेयोनार्दो द विंची || Leonardo Da Vinci in Hindi

महान कलाकार लेयोनार्दो द विंची || Leonardo Da Vinci in Hindi

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  नाम लियोनार्दो द विंची
  जन्म  १५ अप्रैल,१४५२
  मृत्यु  २० मई,१५१९
  पिता का नाम  सर पियरे द विंची
  माता का नाम  कटरीना
  पुत्र का नाम  गियाकामो,सिलाई,लिटिल डेविल
  हस्त पुस्तक  कोडेक्स लिसेस्टर
  पेंटिंग  द मोनालिसा,द लास्ट सुपर

कोई व्यक्ति एक अच्छा मूर्तिकार, डिजाइनर, संगीतज्ञ,चित्रकार, वैज्ञानिक, इंजीनियर व गणितज्ञ इनमे से कोई एक हो सकता है। कोई अच्छा कलाकार हो सकता है, या चिंतक हो सकता है किंतु यदि ये कहा जाय की एक ही व्यक्ति अपने जीवन काल मे ये सभी हो तो ये असंभव लगता है लियोनार्डो बहुमुखी प्रतिभा के धनी एवं सृजन की हर विधा में बेजोड़ थे।


लियोनार्डो की एक हस्त नोटबुक ‘कोडेक्स लिसेस्टर’ 3 करोड़ डॉलर में बिकी थी। बिल गेट्स ने इसे ख़रीदा और कहा यह मेरे लिए एक सस्ता एवं फायदा का सौदा रहा ।

Leonardo Da Vinci Biography 

जन्म :

15 अप्रैल, 1452 को शनिवार के दिन, रात साढ़े दस बजे इटली के टस्कनी में विंची नामक गाँव में एक अविवाहित कटरीना नामक लडकी ने लियोनारदो को जन्म दिया|
जन्म के समय ही पिता पियरो को सर (SER) की उपाधि मिल चुकी थी पियरो द विंची एक दीवानी वकील के रूप में कार्य करता था। पियरे , को कटरीना के अलावा चार पत्नियाँ और थी
दहेज प्रथा के अनुसार जो लड़की या उसका परिवार दहेज की रकम की व्यवस्था नहीं कर पाता था, उसे अविवाहित ही रहना पड़ता था, इसी के कारण कटरीना को भी अविवाहित ही रहना पड़ा कटरीना ने पुत्र को लालन पालन के लिए पियरे को दे दिया और एक गरीब युवक से विवाह कर लिया|

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  • लियोनारदो ने बचपन में किये ऐसे प्रश्न—

  1. रेत के ढेर की ऊँचाई से उसकी चौड़ाई दोगुनी क्यों होती है?
  2. मृत शरीर पानी में क्यों तैरता है?
  3. चिडि़याँ किस प्रकार उड़ान भरती हैं?
  4. यदि मुझे उड़नेवाली मशीन बनानी हो तो कैसे बनाऊँ?

  • लेओनार्दो के बचपन की प्रतिभाशिलता

लियोनारदो बचपन मे गत्ते के विभिन्न आकार के टुकड़े को हवा में फेक दिया करते थे । और उनके गिरने की विभिन्न मुद्राओं का चित्रण बड़ी तेजी के साथ करने का अभ्यास रोज किया करते थे। इस तरह लियोनारदो ने न सिर्फ अपनी चित्रकला में गति ला पाये बल्कि उन्होंने अपने हाथों व आँखों के बीच बहुत अच्छा समन्वय विकसित कर लिया।


  • पादरियों से परहेज:

एक दिन लियोनारदो के स्टूडियो मे एक पादरी आया और स्टूडियो के दिवाल पर लगे चित्र पर पानी डालने लगा। इस पर अचंभित होकर लियोनार्डो ने पूछा, ‘आप ये क्या कर रहे हैं? ‘प्रिय पुत्र मैं इन चित्रों को इस पवित्र जल से पवित्र कर रहा हूँ।’ पादरी ने ऐसा कहा। लियोनार्डो तब क्रोध से भर गया । उसने कहा, ‘इन चित्रों को किसी पवित्रता की आव्यसकता नही यह पवित्र हैं।’और फिर खिसियाए हुए पादरी के ऊपर एक बालटी पानी फेक दिया और कहा, ‘चले जाओ वापस मत आना

लियोनार्डो अकसर पक्षियों के पिंजरों को खरीद लेते और बंद पछियो को खुले आसमान में छोड़़ देते।

  • व्यक्तिगत जीवन :


लियोनार्डो अपने आप में एक महान व्यक्ति थे। उनका चिंतन अनोखा था और विचार दृढ़ होते थे। वे जमाने से हटकर सोचते थे। उनकी सोच व सासमझ बिल्कुल अलग थी। उन्होंने जीवन पर्यंत कभी विवाह नहीं किया। वे अपने जीवन के उनतालीस वर्ष अकेले ही रहे । फिर उन्होंने एक बच्चे को गोद लिया।
जजिसकी उम्र दस वर्ष थी और लियोनारदो ने जिस लड़के को गोद लिया वह अनाथ एवं गरीब था और कपडे के नाम पर उसके तन पर चिथरे थे। उस लड़के का रंग काला एवं बाल घुँघरैले थे उस बालक का नाम गियाकामो था। लियोनार्डो के द्वारा उस लड़के को सिलाई नाम मिला जिसका मतलब —छोटा शैतान होता है।
लियोनार्डो उस बालक को बहुत प्यार करता था। लियोनारदो ने उस लड़के को हर तरह की सुविधाए दिया जैसे अच्छा भोजन,अच्छे कपड़े लेकिन वह लड़का बिगड़ता चला गया। लियोनार्डो सीलाई को एक कलाकार बनाना चाहता था, किंतु लड़के ने कला में रुचि नहीं लिया।कोई और कार्य सिखाना भी व्यर्थ रहा।
धीरे-धीरे वह लड़का बिगड़ता चला गया। उसने चोरी भी करना शुरू कर दिया। लियोनार्डो का उससे अकसर लड़ाइ और झगड़ा होता था।
अंततः लियोनार्डो ने उस लड़के से परेशान होकर कहा मुझे चैन से रहने दे।बाद में उस लड़के को लियोनारदो ने‘लिटिल डेविल’ कहा।
लियोनार्डो ने मरने से पहले अपनी सम्पति का आधा हिस्सा लड़के को दे दिया
परंतु पिता पियरो ने मरने से पूर्व कोई संपत्ति नहीं छोड़ी।

Leonardo Da Vinci Paintings

  • कालजयी रचना ‘द लास्ट सुपर (Leonardo Da Vinci The Last Supper):

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वर्ष 1495 में मिलान के राजा लुडविको को एक खयाल आया कि मठ मे भोजन करने वाले स्थान के दिवाल पर एक पेंटिंग बनवाई जाय जो अंतिम भोजन’ (रात्रि का) से संबंधित हो
इसे म्युरल कहा जाता है इस पेंटिंग को बनाने का काम लियोनारदो को मिला
जीसस ने ऐसा ही भोजन अपने अंतिम दिन किया था उस दिन वो अपने के शिष्यों के साथ भोजन पर बैठे थे महत्त्वपूर्ण बात तो ये है की उस रात उन्हे पता था की उनका एक शिष्य उन्ह धोखा देने वाला है उसके अगले ही दिन जीसस को सूली पर चढ़ा दिया गया
लियोनार्डो ने लगभग दो वर्षों में इस चित्र को तैयार कर लिया,जो लगभग 4.6 मीटर ऊँची, 8.8 मीटर लंबी तथा जमीन से 2 मीटर की ऊँचाई से प्रारंभ होती थी।किन्तु इसमे जीसस और उनके ग्यारह शिष्य ही बने थे । अभी जूडास नामाक शिष्य का बनना बाकी था। लियोनार्डो की
बाइबिल में लिखा है, जूडास एक विश्वासघाती व्यक्ति था। लियोनार्डो चित्र से जूडास के विश्वासघाती दृश्य को स्पष्ट दर्शाना चाहता ।
1497 का पूरा वर्ष जुडास जैसे चरित्र वाले पुरुष को खोजने बीत गया । पर कुछ महीनों बाद लियोनार्डो की उपयुक्त चरित्र की तलाश पूरी हुई। जूडास का पूरा चरित्र चित्र में उभर कर सामने आ गया । लियोनार्डो ने अपनी कालजयी रचना ‘अंतिम रात्रि का भोजन’ को सम्पूर्ण कर लिया

विकिपीडिया पर पढ़े -द लास्ट सपर


  • लेयोनार्दो की एक और अमर रचना मोनालिसा ( Leonardo Da Vinci the MonaLisa):


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सन् 1505 में लेओनार्दो ने मोनालिसा के पेंटिंग की रचना की। मोनालिसा कौन थी, इस बारे में अलग-अलग कलाकारो अलग -अलग मत है । कुछ कलाकारों का मानना है कि मोनालिसा एक व्यापारी फ्रांसिस्को डेल गियोकोंडो की पत्नी थी। सायद इसलिये क्योंकि मोनालिसा को ‘ला गियोकोंडो’ भी कहा जाता है पर कुछ लोगो का मानना है की मोनालिसा एक वैश्या थी।
पर इसका भी कोई साक्ष्य नहीं मिलता है। अनेक लोगो का तो यहाँ तक मानना है की यह तस्वीर लियोनार्दो की माँ कटरीना की है।
विश्व की सर्वश्रेष्ठ कृति होने का श्रेय मोनालिसा के मुसकान को दिया जाता। मोनालिसा की मुस्कान अत्यंत आकर्षक एवं मोहक है।
मुस्कान इसलिए इतना क्रन्तिकारी हो गया क्योंकि उन दिनों कोई भी अपनी तस्वीर गंभीर मुद्रा में ही बनवाता था।
यह मान्यता प्रचलित हैं कि—मोनालिसा एक अत्यंत गंभीर व रोनी सूरत वाली युवती थी और उसे हँसान एक चुनौतीपूर्ण कार्य था।पर लियोनार्डो ने मोनालिसा चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए अनेक संगीतज्ञों, जोकरों की मदद लेनी पड़ी थीं।जोकरो के द्वारा मोनालिसा को हँसाते वक्त ही लेओनार्दो तस्वीर बनाता था।
इसके बारे में एक बात की कही जाती है मोनालिसा के मुख में एक भी दांत नहीं थे और वह हमेसा नकली दांत लगाये रहती थी।जोकर के हँसाने पर मोनालिसा मुसकराकर रह जाती थी। शायद इसीलिए उसकी मुसकान अनोखी है।
इतना ही नहीं कहा तो यहाँ तक जाता है कि मोनालिसा कोई और नही लेओनार्दो ही है ।कहा जाता है लेओनद्रो ने स्त्री के जैसे खुद को तैयार करके शीशे में देखकर खुद की तस्वीर बनाई थी।
अनुमान है उस वक्त कलाकार पैसे लेकर तस्वीर बनाते है यह तस्वीर भी उसी तरह बनाई गई होगी
यह चित्र 77 सेंटीमीटर लंबा और 53 सेंटीमीटर चौड़ा था। लियोनार्डो ने इस तस्वीर को बनाने के लिए स्मोकी फुमोती तकनीक का प्रयोग किया था।
बाद में इस पेंटिंग को फ्रांस के राजा लुई बारहवें ने खरीद लिया था। इसके साथ ही यह मोनालिसा भव्य राजमहलों की शोभा बन गई।

विकिपीडिया पर पढ़े - द मोनालिसा

मृत्यु:

लेओनार्दो 20 मई, 1519 को इस दुनिया को छोड़ के चले गए। लोगों का कहना है कि मृत्यु के वक्त फ्रांस का राजा उनके साथ ही था और लियोनार्दो ने अपनी आखरी सांस राजा के बाहों में ली ।
लेकिन अनेक लोगो ने इसका विरोध करते हुए खंडन किया और कहा की राजा उस वक्त लेओनार्दो से मिलो दूर था ।
लियोनार्डो के शरीर को दफन होने के लिए अपने देश की जमीन भी नसीब नहीं हुई। परंतु इस महान् चित्रकार के सम्मान में इनके शरीर को फ्रेंच चैपल में दफनाया गया।

यह भी पढ़े : कला क्या है?


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निर्णय लेना भी सिख जाएगा
पिता तेरे लिए वो जमीं है
जिसपर हमेशा तु खुद को खड़ा पाएगा

आज नही तो कल ये तु जान जाएगा
पिता के सिख से बढ़कर कोई सिख नही होती
पिता के होने से बढ़कर कोई तक़दीर नही होती
पिता के न होने से बढ़कर कोई पीर नही होती

माँ के दी सीखो का करले ध्यान
खुद पर विश्वास करना तु सिख जाएगा
माँ तो तेरे लिए वो दरवाजा है
जिसे तु हमेशा खुला पाएगा

आज नही तो कल तु ये जान जाएगा
माँ से बढ़कर कोई चीज नही होती
माँ से अच्छी कोई तस्वीर नही होती
माँ के होने से बड़कर कोई तकदीर नही होती

कोहरा चाहे कितना भी घना हो
सूरज के गर्मी से हट जाता है
अंधेरा चाहे कितना भी घना हो
सुबह के रोसनी के आगे न टिक पाता है  

भ्रम चाहे कितना भी बड़ा हो
खुद पर विश्वास से मिट जाएगा
अज्ञान चाहे कितना भी ज्यादा हो
गुरु के ज्ञान के आगे न टिक पायेगा

तु खुद को पहचान जाएगा
आज नही तो कल तु ये मान जाएगा
आदत चाहे कितनी भी बुरी हो
दृढ़ विश्वास से छुट जाएगा
रात चाहे कितनी भी लम्बी हो
कल सवेरा फिर आएगा
आज नही तो कल तु ये मान जाएगा
तु खुद को पहचान जाएगा

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माँ...आज जो कुछ भी हूं सब तेरी वजह से हूं!  जब मै पहली बार चला था   कभी गिरता था कभी समहला था  पैरों पर खड़ा होकर चलना सिखाया तूने
खुद पर यंकिन करना सिखाया तूने
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मै हूँ परिंदा मंगल यान है जिसका नाम
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वदा है दुर छितिज से सन्देश ले आऊंगा
मानव तेरे लिए एक जमीन एक देश ले आऊंगा

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न रोक पाएंगा अंधी मुझे न रोक पाएंगा तूफान
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जय हो मंगल यान.......
जय हो मंगल यान.......
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