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एक रोज आखिर पुस्तकालय मुझसे बोल पड़ा || Motivational Poem in Hindi for Student

एक रोज आखिर पुस्तकालय मुझसे बोल पड़ा || Motivational Poem in Hindi for Student 

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एक रोज आखिर पुस्तकालय मुझसे बोल पड़ा || Motivational Poem in Hindi for Student 

एक रोज आखिर पुस्तकालय मुझसे बोल पड़ा 
क्या  हुआ तुझे जो स्तंभित और अशांत इधर उधर डोल रहा 
न भूवन पर आधी आयी और न ही  बादल गर्जनाकर कुछ बोल रहा 
तो फिर क्यो चिर संतृप्त हो तू इधर उधर तु देख  रहा।।

 आ बैठ मेरे अघोष में 
मैं तुझे समझाता हूँ
तेरे बेचैन मन को 
 शांत करने का उपाय सुझाता हूँ
           
   जहाँ  सुख भी और दुख भी  है
  जय भी  और पराजय भी है 
  मान भी और अपमान भी है
     और जिंदगी जीने का ज्ञान भी है ।।।

आ खोजले जो कुछ तुझे पाना है 
कर खुद से वादा मुझमे डूब जाना है 
मुझे तो तेरा हर हाल में साथ निभाना है 
     तुझे ही बस खुद को आजमाना है    

मै तो तेरे लिए वो सिख हूँ
की जैसे सहस्त्र ह्रदय की चीख हूँ
  तु अकेला नहीं है जिसे मै सिखाता हूँ
तेरे जैसे अनेको भटके पथिको को राह दिखता हूँ

   
    कुंजी है पुस्तकालय तेरा  
   उसे पढ़ विश्लेषण कर ज़रा 
     यही पर है हर उलझनों का समाधान तेरा ।  
      शोध छात्र
        शिव कुमार खरवार 
     राजनीतिक विज्ञान विभाग
डॉ.भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी
               लखनऊ ।  

Comments

  1. Woow 😍
    Woow 😍
    Woow 😍
    Nice Poem 📖📓 on Library 📚

    ReplyDelete

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जिसपर हमेशा तु खुद को खड़ा पाएगा

आज नही तो कल ये तु जान जाएगा
पिता के सिख से बढ़कर कोई सिख नही होती
पिता के होने से बढ़कर कोई तक़दीर नही होती
पिता के न होने से बढ़कर कोई पीर नही होती

माँ के दी सीखो का करले ध्यान
खुद पर विश्वास करना तु सिख जाएगा
माँ तो तेरे लिए वो दरवाजा है
जिसे तु हमेशा खुला पाएगा

आज नही तो कल तु ये जान जाएगा
माँ से बढ़कर कोई चीज नही होती
माँ से अच्छी कोई तस्वीर नही होती
माँ के होने से बड़कर कोई तकदीर नही होती

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सुबह के रोसनी के आगे न टिक पाता है  

भ्रम चाहे कितना भी बड़ा हो
खुद पर विश्वास से मिट जाएगा
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गुरु के ज्ञान के आगे न टिक पायेगा

तु खुद को पहचान जाएगा
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हा मै एक परिंदा हूँ

हक है आसमा पर
तो हक जमाता हूँ
उड़ने की है हिम्मत
तो खुद को आजमाता हूँ

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वरना खुले गगन में ही अपना बसेरा है
अभी तो डाल डाल पात पात खाख खाख छानना बाकि है
खुले गगन में क्या कहा है हर बात जानना बाकि है

मै हूँ परिंदा मंगल यान है जिसका नाम
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वदा है दुर छितिज से सन्देश ले आऊंगा
मानव तेरे लिए एक जमीन एक देश ले आऊंगा

न रोको मुझे मै एक परिंदा हूँ
मै हूँ भारत के मंगल अभियान का मंगल यान
न रोक पाएंगा अंधी मुझे न रोक पाएंगा तूफान
चीरती हुए हवाओ में मै भरुंगा उड़ान

जय हो मंगल यान.......
जय हो मंगल यान.......
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