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Tuesday, 7 April 2020

Atal Ji Ki Kavita ( अटल जी की कविताएँ )

Atal Ji Ki Kavita ( अटल जी की कविताएँ ) 

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आओ फिर से दिया जलाएँ -
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ

हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ


दुनिया का इतिहास पूछता -
दुनिया का इतिहास पूछता,
रोम कहाँ, यूनान कहाँ?
घर-घर में शुभ अग्नि जलाता।
वह उन्नत ईरान कहाँ है?

दीप बुझे पश्चिमी गगन के,
व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा,
किन्तु चीर कर तम की छाती,
चमका हिन्दुस्तान हमारा।

शत-शत आघातों को सहकर,
जीवित हिन्दुस्तान हमारा।
जग के मस्तक पर रोली सा,
शोभित हिन्दुस्तान हमारा।


जो बरसों तक सड़े जेल में, उनकी याद करें -
जो बरसों तक सड़े जेल में, उनकी याद करें।
जो फाँसी पर चढ़े खेल में, उनकी याद करें।

याद करें काला पानी को,
अंग्रेजों की मनमानी को,

कोल्हू में जुट तेल पेरते,
सावरकर से बलिदानी को।

याद करें बहरे शासन को,
बम से थर्राते आसन को,

भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू
के आत्मोत्सर्ग पावन को।

अन्यायी से लड़े,
दया की मत फरियाद करें।

उनकी याद करें।
बलिदानों की बेला आई,

लोकतंत्र दे रहा दुहाई,
स्वाभिमान से वही जियेगा

जिससे कीमत गई चुकाई
मुक्ति माँगती शक्ति संगठित,

युक्ति सुसंगत, भक्ति अकम्पित,
कृति तेजस्वी, घृति हिमगिरि-सी

मुक्ति माँगती गति अप्रतिहत।
अंतिम विजय सुनिश्चित, पथ में

क्यों अवसाद करें?
उनकी याद करें।


Atal Bihari Vajpayee In Hindi ( अटल बिहारी )

Atal Bihari Vajpayee In Hindi : Atal Bihari Vajpayee ( जीवन परिचय )


नामअटल बिहारी वाजपेयी 
जन्म 25 दिसम्बर 1924 
जन्म स्थान  मध्य प्रदेश के ग्वालियर के शिंदे छावनी में 
पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी 
माता का नाम कृष्णा देवी 
मुख्य  पदवि  भारत के पूर्व प्रधानमंत्री 
मृत्यु 16 अगस्त 2018 


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक महान राजनैतिक , कवि , एवं प्रखर वक्ता थे | जिन्होंने अपने  सम्पूर्ण  जीवन को  भारत माता ( भगवती ) की सेवा में व्यतीत कर दिया |इस दौरान यह  देश  के तीन बार  क्रमश : १९९६  १९९८ ,२००४ ई ० में प्रधानमंत्री बने | जो अपने उदार चरित्र एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए जाने जाते है | जिसका अनुमान एक घटना से लगाया जा सकता है जब गुजरात राज्य सांप्रदायिक आग में जल रहा था | उस समय अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री ( वर्तमान ) नरेद्र मोदी जी को सांप्रदायिक गतिविधियों को  लेकर फटकार लगाई |अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व अति प्रेरणादायक था | जिनकी मिसाल आज भी दी जाती है | इसके अभूतपूर्व कार्य के लिए भारत सरकार के द्वारा इनको भारत रत्न से नवाजा गया |अटल बिहारी वाजपेयी अपनी  बेबाग कविता के लिए विशेष रूप से जाने जाते था | अटल बिहारी वाजपेयी न केवल एक कवि था बल्कि एक कुशल वक्ता एवं वरिष्ट पत्रकार भी थे | अटल बिहारी वाजपेयी भारत के सबसे बड़े स्वयं सेवी संगठन आरएसएस के सदस्य भी थे | 


अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय -

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को मध्य राज्य के ग्वालियर नगर में स्थित शिंदे छावनी में हुआ था | इनके पिता का कृष्ण बिहारी वाजपेयी तथा माता का  नाम कृष्णा देवी था | इनकी प्रारम्भिक शिक्षा - दीक्षा का कार्य मध्य प्रदेश राज्य में स्थिर ग्वालियर नगर में हुआ था | इन्होने विक्टोरिया कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई दिशा में इन्होने राजनैतिक विज्ञान के क्षेत्र में कानपूर के डीएवी कॉलेज से की  | यही से इन्होने एम० ए० की डिग्री प्राप्त की | आगे की पढ़ाई को जारी रखते हुए |इन्होने विधि की  शिक्षा प्राप्त कि जब विधि की  शिक्षा प्राप्त कर रहे तो उनको अपने मित्र एवं सहपाठी के रूप में अपने पिता का संरक्षण प्राप्त था | क्योकि अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन अत्यन्त रोमाच से भरा हुआ था | जिसके मुख्य वजह यह भी था उनके पिता का नाम और सख्सियत उनके साथ हमेशा जुड़ी रही |यही वजह है की कविता पाठन एवं लेखन  का गुण इन्हें प्राप्त हुआ | क्योकि इनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी एक जानेमाने कवि थे | इसलिए वंशानुगत उपहार के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी को कविता लेखन एवं पाठन का सौभाग्य प्राप्त हुआ | अटल बिहारी वाजपेयी ने आजीवन विवाह नही किया किन्तु बिन विवाह के ही उनको एक बच्ची के पिता होने का गौरव प्राप्त हुआ  | जिसका कारण था की उन्होंने विवाह न करने का निश्चय किया था | यद्यपि यही वजह रहा हो की  उन्होंने विवाह नही किया किन्तु कुछ साक्ष्य तो यह भी कहते है की अटल बिहारी वाजपेयी शादी से पूर्व ही एक बच्चे के पिता बन गये थे | अर्थात् अटल बिहारी वाजपेयी एक पिता न कहे जाने के सुख से वंचित नही थे | क्योकि जिसका कारण था कि उन्होंने  एक बच्ची को गोद ले लिया था |अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन बहुत विवादों से घिरा रहा है |जैसा की हम सभी जानते है की अटल बिहारी वाजपेयी जी का  जन्म एक ब्राहमण परिवार में हुआ था किन्तु ये  मास मछली खाना अति शौखिन थे | जो कदाचित एक ब्राहमण परिवार में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए पाप माना जाता है | जो भी हो अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व से काफी सकारात्मक चीजे सिखने को मिलती है जैसे की उनकी राजनीति में अत्यधिक रूचि थे | जिसका प्रभाव उनके जीवन में स्पष्ट रूप से प्रतिलक्षित होता है | इसलिए उन्होंने राजनीतिक दुनिया में कदम रखा | अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन मे राजनैतिक सफर की शुरूआत वैसे तो इसके जीवन के प्रारम्भिक समय में हो जाती है | जब अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ में सम्पर्क में आते है | किन्तु ज्यादातर लोगो का यह मानना  है | अटल बिहारी वाजपेयी के राजनैतिक जीवन  की शुरुआत भारत छोड़े आन्दोलन से आरम्भ होती है | जब उन्होंने भारत छोडो आन्दोलन में अंग्रेजो के विरुद्ध भाग लिया | जिसकी वजह से  इनको अग्रेजी हुकुमत के कुरुरता का भागी बनना पड़ा |लगभग २४ दिन के कारावास की सजा काटने के  बाद इनको रिहाई मिली | यही से अटल बिहारी वाजपेयी के राजनैतिक करियर की  वास्तविक  शुरुआत होती है  | 6 अप्रैल १९८० में गठित होने वाले भारतीय जनता पार्टी के सक्रीय सदस्य  एवं प्रथम अध्यक्ष बने | अटल बिहारी वाजपेयी ही एक मात्र ऐसे नेता है | जो भारत के चार राज्यों उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश ,गुजरात , नई दिल्ली के छ : लोकसभा सीटो पर नुमाईदगी कर चुके है  तथा लोकसभा से दस बार चुने जा चुके है  इसके अलावा राज्यसभा से दो बार १९६२ और १९८६ चुने गये |  अटल बिहारी वाजपेयी के राजनैतिक दूरदर्शिता के लिए  एक बार  भारत में पूर्व प्रधानमंत्री  मनमोहन सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी को राजनिति का भीष्म पितामह  कहकर सम्बोधित किया था | अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक कवि ही नही थे अपितु अटल बिहारी वाजपेयी को पत्रकारिता के क्षेत्र में एक विशेष मुकाम प्राप्त था | वे अपनी बातो मजबूती के साथ रखने के लिए  को कविताओ का सहारा लिया करते थे | उन्होंने राजधर्म एवं पांचजन्य नामक दो प्रसिद्ध  मासिक पत्रिका का सम्पादक किया | इसके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा स्वदेशी व वीर अर्जुन नामक दैनिक पत्रिका के भी सम्पादक किया गया | भारत के दसवे प्रधानमंत्री रहे | अटल बिहारी वाजपेयी भारत के दिग्गज नेताओ में से एक माने जाते है | भारत के प्रधानमंत्री के इतिहास में सबसे अधिक बार प्रधानमंत्री चुने जाने का ख़िताब अटल बिहारी वाजपेयी को प्राप्त है | यह भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस पार्टी के पंडित जवाहरलाल नेहरु से भी एक बार ज्यादा प्रधानमंत्री बने है जबकि  पंडित जवाहरलाल नेहरु भारत के केवल दो बार प्रधानमंत्री रहे है | अर्थात्  अटल बिहारी वाजपेयी  भारत के  तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके है |वैसे तो अटल बिहारी वाजपेयी  ने भारत भूमि के लिए बहुत से कार्य किये है जिनमे सबसे प्रमुख भारत को परमाणु सम्पन्न राष्ट्र बनाने में उनका योगदान है | वैश्विक पटल पर परमाणु परीक्षण की अनुमति न होने के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी ने १९९८ में  भारत में परमाणु परीक्षण कर भारत को परमाणु सम्पन्न देश में शामिल होने का कृतिमान स्थापित किया  | पी 5 देशो के पुरजोर विरोध के बावजूद भारत में परमाणु परीक्षण किया | यह भारत के प्रधानमंत्री के सशक्त इच्छा शक्ति के कारण  हो सका |अटल बिहारी वाजपेयी भारत के ऐसे प्रधानमत्री है| जिन्हें कई उपाधियों से नवाजा गया जिसमे प्रमुख पद्म श्री पुरस्कार , लोकमान्य गंगाधर तिलक पुरस्कार ,सन १९९४ में  श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार , गोविन्द बल्लव पंत पुरस्कार  इसके अलावा २०१५ में अटल बिहारी वाजपेयी भारत के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया | कहते है न काल से कोई नही बच सका तो अटल बिहारी वाजपेयी कैसे बच जाते वह  दिन भी आ गया जब महान कवि , समाज सुधारक , राजनैतिक , प्रखर वक्ता , पत्रकार , साहित्य में विशेष रूचि रखने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु नई दिल्ली में स्थित एक चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स )  में  16 अगस्त 2018 को शायकाल 5 बजकर 5 मिनट पर बीमारी के कारण हो हुआ | यह महान कवि , राजनेता जो इस रात्रि को चिर निद्रा में सो गये |

पुरस्कार -

  • पद्म श्री पुरस्कार (1992)
  • लोकमान्य गंगाधर तिलक पुरस्कार (1994)
  • श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार (1994)
  • गोविन्द बल्लव पंत पुरस्कार (1994  
  • भारत रत्न (2015)
  • डी लिट ( कानपूर विश्वविद्यालय के द्वारा 1993  , मध्य प्रदेश मुक्त भोज विश्वविद्यालय के द्वारा 2015 में 
  • फ्रेड्स आफ बांग्लादेश लिबरेशन वॉर अवार्ड (2015)

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रमुख रचनाए -

  • अमर आग है |
  • सेक्युलर वाद 
  • रंग रंग हिन्दू मेरा परिचय 
  • मृत्यु या  हत्या 
  • अमर बलिदान 
  • बिंदु बिंदु विचार 



   


Friday, 3 April 2020

Kabir Das Ke Dohe( कबीर के दोहे )

Kabir Das Ke Dohe ( कबीर के दोहे )

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कबीरदास जी भक्तिकाल के ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि है | कबीर दास जी के दोहे शांत रस प्रधान होते है |हिन्दी साहित्य में महा कवि कबीर दास का योगदान अदुतीय है | संत कबीर दास जी ने अपने विलक्षण प्रतिभा से हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में अतुलनीय वृध्दि की है | आइये पढ़ते है कबीर दास के अमृत के समान दोहे |

Kabir Das Ke Dohe(10 dohas of kabir in hindi )

-1-
बुरा जो देखन मै चला , बुरा न मिलिया कोय | 
जो मन देखा आपनो ,  मुझसे बुरा न कोय ||(kabir das ke dohe)

अर्थ : 
कबीरदास जी कहते है कि जब मै इस संसार में बुरे व्यक्ति  की तलाश निकला तो इस संसार में मुझे किसी बुरे   व्यक्ति की प्राप्ति नही हुई | किन्तु जब मैंने अपने  अंतरात्मा  में झाककर देखा तो पाया की  इस पुरे  संसार में मुझसे बुरा कोई नही है |
-2-
पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ , पंडित भया न कोय | 
ढाई आखर प्रेम का , पढ़े सो पण्डित होय ||(kabir das ke dohe)

अर्थ :
कबीरदास जी कहते है कि इस संसार में बड़ी - बड़ी पुस्तको का अध्ययन करने वाले नजाने कितने ही लोग अंततः मृत्यु को प्राप्त हो जाते है .किन्तु सभी विद्वान  नही बन पाते है | यद्यपि कबीरदास जी का मानना है कि यदि मनुष्य  ढाई अक्षर के शब्द प्रेम के अर्थ अथवा प्रेम के वास्तविक रूप को पहचान जाता है | तो उसे सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है |    
-3-
साधु ऐसा चाहिए , जैसा सूप सुभाय |
सार सार को गहि रहै , थोथा देई उड़ाय ||(kabir das ke dohe)

अर्थ :
कबीरदास जी कहते है कि इस संसार में ऐसे सज्जन स्वभाव वाले साधु की जरुरत है जिसका स्वभाव सूप के समान हो अर्थात जो सार्थक चीज को इकठ्ठा करे निरर्थक चीजो को धुल की भांति उड़ा दे |
-4-
तनिका कबहूँ ना निन्दिये , जो पावन तर होय |
कबहूँ उड़ी आँखिन पड़े , तो पीर घनेरी होय ||(kabir das ke dohe)

अर्थ :
कबीरदास जी कहते है कि हमे छोटे से छोटे व्यक्ति अथवा वस्तु की निंदा नही करनी चाहिए क्योकि पाव के निचे दबा घास का  तिनका भी यदि कभी उड़कर  हमारे आंख में  पड़  जाए तो वह हमे असहनीय दर्द अथवा पीड़ा  को  दे  सकता है | 
-5-
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जाति न पूछो साधु की , पूछ लीजिये ज्ञान |
मोल करो तलवार का , पड़ा रहन दो म्यान ||(kabir das ke dohe)

अर्थ :
कबीरदास जी कहते है कि हमे कभी भी किसी साधु से उसकी जाति नही पूछनी चाहिए कहने का अर्थ यह है की कबीरदास ने साधु के जाति और साधु के ज्ञान के  बीच साधु के ज्ञान को अधिक महत्त्व देते है क्योकि साधु ज्ञान का पर्याय होता है | कबीरदास जी इस बात को स्पष्ट करने के लिए साधु के ज्ञान की उपमा तलवार से करते है और जाति की उपमा मयान से की है  जिस प्रकार तलवार हमारे लिए  म्यान से  अधिक उपयोगीय  होता है | ठीक उसी प्रकार साधु का ज्ञान उसके जाति से ज्यादा श्रेष्ठ है |
-6-
कबीरा कुआ एक है , पानी भरे अनेक |
बर्तन में ही भेद है , पानी सब मे एक ||(kabir das ke dohe)

अर्थ : 
कबीर दास जी कहते है कि जिस प्रकार पानी भरने वाला कुआँ एक होता है किन्तु पानी भरने वाले अनेक होते है | यहाँ तक की पानी के बर्तनों में भी भेद हो सकता है किन्तु  इन सभी बर्तनों में पानी एक ही होता है | कबीरदास जी कहते है कि ईश्वर के लिए सभी व्यक्ति समान होते है | मनुष्य ने ही खुद को विभिन्न जाति, धर्म ,में बाट लिया है |  
-7-
अति का भला न बोलना, अति की भली न चुप |
अति का भला बरसना, अति की भली न धूप ||(kabir das ke dohe)

अर्थ :
कबीर दास जी कहते है कि न तो अत्यधिक बोलना अच्छा है और न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है | जिस प्रकार बहुत अधिक वर्षा का होना भी अच्छा नहीं होता और बहुत अधिक धूप का होना भी अच्छा नहीं होता है | 

-8-
निंदक नियरे राखिए,आँगन कुटी छवाय |
बिन पानी, साबुन  बिना, निर्मल करे सुभाय ||(kabir das ke dohe)

अर्थ :
कबीर दास जी कहते है कि जो आपकी निंदा करे उसे जितना हो सके अपने करीब ही रखना चाहिए
ऐसे व्यक्ति तो बिना साबुन और बिना पानी के ही हमारी कमियों को बता कर कमियों को हमसे दुर करने में हमारी मदद करते है | 

-9-
दुःख में सुमिरन सब करे ,सुख में करे न कोय |
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ||(kabir das ke dohe)

अर्थ :
कबीर दास जी कहते है कि जब दुःख का समय आता है तभी और केवल तभी सभी लोग भगवान को याद करते है और जब सुख का समय आता है तो भगवान को भूल जाते है | कबीर दास जी कहते है कि जो व्यक्ति सुख के समय में भी भगवान को स्मरण करता रहे है तो फिर उसे दुःख होने का कोई कारण नहीं होता है | 
-10-
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर |
पंथी को छाया नहीं, फल लागत अति दुर ||(kabir das ke dohe)

अर्थ :
कबीर दास जी कहते है कि उस व्यक्ति की शक्तियों का कोई मोल नहीं जिसके गुण खजूर के समान हो क्योंक खजूर के पेड़ से न तो फल प्राप्त करना आसान है न ही किसी राही को छाया मिलना सम्भव है | 

यह कबीर दास का दोहा संग्रह आपको कैसा लगा आप अपने सुझाव कमेंट बॉक्स में कमेंट करके दे सकते है  - धन्यवाद्
  
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Friday, 25 October 2019

Diwali Poem in Hindi ( छुर-छुरिया )

Diwali Poem in Hindi : कहीं छु छु करती छुछुरिया

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Diwali Poem in Hindi

दीपावली पर कविता ( Diwali Poem in Hindi ) :.:



कहीं छुर-छुर करती छुर-छुरिया
कहीं चट-पट फटते पटाके रे
कहीं चुट-पुट करती चुटपुटिया
कहीं ना बचे अब सन्नाटे रे


मिट गया अंधियरा यारा
मिट गये सन्नाटे रे
शुरू हो गया हो जैसे
मस्ती सैर सपाटे रे


कोई छोडे छुर छुरिया
तो कोई मुर्गाछाप पटाके रे
कोई बजावे चुट-पुटिया 
तो कोई रॉकेट के फ़वारे रे


कहीं रंगो से सजी रंगोली
तो कहीं दिपों का माला रे
कहीं दोस्तो की है दोस्ती
तो कहीं बड़ो का बचपना रे


सारे मुसाफिर घर को आये
घर ही सबका ठिकाना रे
मिट गई है दूरी सबकी
मिलता यार याराना रे


रोशनी का त्यौहार दिवाली
सब मिलकर साथ मनाना रे
खत्म हो जाएगा अंधियारा
बस मिलकर दीप जलाना रे
Diwali Poem in Hindi नामक पोएम आपको कैसा लगा | आप अपने  सुझाव कॉमेट बॉक्स में कॉमेट करके दे सकते है - धन्यवाद ! 
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Poet-
Kishan
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Saturday, 19 October 2019

यादो की बारात || Love Poem For Lovers In Hindi

यादो की बारात || Love Poem For Lovers In Hindi

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अभी तो बाकी वो सुबह वह साम है
जिसपे लिखे तेरे - मेरे नाम है
मिल जा तु कही किसी मोड पे
मेरे दिल  मे बस यही अरमान है

तुझको कैसे बताऊँ तुझमे बसी मेरी जान है
तेरे बिना न कोई मेरा जहान है
तुझको बता दूँ तु कितनी अंजान है
तेरे  लिए मेरी तो जां भी कुरबान है

तेरे बिना न मेरी पहचान है
तेरे बिना हर रास्ते सुनसान है
तेरे बिना तो मेरी जिंदगी वीरान है
फिर भी तू न जाने क्यों मेरे दर्द से अंजान है

अभी तो बाकी वो लम्हे वो एहसास है
जिसमे बीतता हर लमहा वक्त का तुम्हारे साथ है
छोड़ देना न तुम साथ मेरा
तुम्हारे बिना यह जिंदगी उदास है

क्यों न आती अब  वो सुबह-साम है
माना अभी तो वो सुबह साम नही है
फिर भी मेरे लिए तु आम नही है
बुझ जाये जो मेरे लिए तु वो अरमान नही है

क्यो न आती अब वो सुबह-साम है
जिसपल तेरी नयनो में ही मेरा स्थान है
जिस पल तेरी  निगाहे ही मेरी पहचान है
मिल जा तु कही किसी मोड़ पे बस यही अरमान है 

माना अभी  तो वो सुबह साम नही है
फिर भी तेरे सिवा मेरे होठो पर कोई नाम नही है
अब तो असक को भी विराम नही है, नयनो मे कोई स्थान नही है
माना अभी तो वो सुबह वो साम नही है



Poet-
Kishan
Great love from Deva kala sansar
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Wednesday, 2 October 2019

Sketch Of Boy

Sketch Of Boy : Sketch Drawing of Smart Boy

Sketch Of Boy : Mohit Modanwal 

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Sketch of Boy

Real Photo :Mohit Modanwal

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How to make a sketch of boy -
  • In this drawing(sketch of boy) I have use only HB,2b,4b,pencil and normal eraser
  • This  drawing(sketch of boy) take time in preparation is 3 hours 
  • This boy is  my best friend and my classmate also. This boy name is Mohit modanwal  
  • very difficult part to draw in this sketch is mirror image in goggle 
  • In this drawing(Sketch of Boy),I have try to show natural beauty of boy 
Sketch Of Boy यह ड्राइंग आपको कैसी लगी आप अपने सुझाव कमेंट करके दे सकते है |

MORE    -PHOTO TO PENCIL SKETCH
Art By -Deva

Tuesday, 24 September 2019

Leonardo Da Vinci in Hindi( लेयोनार्दो )

Leonardo Da Vinci in Hindi ( महान कलाकार लेयोनार्दो द विंची ) 

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  नाम लियोनार्दो द विंची
  जन्म  १५ अप्रैल,१४५२
  मृत्यु  २० मई,१५१९
  पिता का नाम  सर पियरे द विंची
  माता का नाम  कटरीना
  पुत्र का नाम  गियाकामो,सिलाई,लिटिल डेविल
  हस्त पुस्तक  कोडेक्स लिसेस्टर
  पेंटिंग  द मोनालिसा,द लास्ट सुपर

Who is Leonardo Da Vinci ( कौन है लियोनार्दो द विंची ) -

कोई व्यक्ति एक अच्छा मूर्तिकार, डिजाइनर, संगीतज्ञ,चित्रकार, वैज्ञानिक, इंजीनियर व गणितज्ञ इनमे से कोई एक हो सकता है। कोई अच्छा कलाकार हो सकता है, या चिंतक हो सकता है किंतु यदि ये कहा जाय की एक ही व्यक्ति अपने जीवन काल मे ये सभी हो तो ये असंभव लगता है लियोनार्दो द विंची(Leonardo Da Vinci) बहुमुखी प्रतिभा के धनी एवं सृजन की हर विधा में बेजोड़ थे।


लियोनार्डो की एक हस्त नोटबुक ‘कोडेक्स लिसेस्टर’ 3 करोड़ डॉलर में बिकी थी। बिल गेट्स ने इसे ख़रीदा और कहा यह मेरे लिए एक सस्ता एवं फायदा का सौदा रहा ।

Leonardo Da Vinci Biography 

जन्म :

15 अप्रैल, 1452 को शनिवार के दिन, रात साढ़े दस बजे इटली के टस्कनी में विंची नामक गाँव में एक अविवाहित कटरीना नामक लडकी ने लियोनारदो को जन्म दिया|
जन्म के समय ही पिता पियरो को सर (SER) की उपाधि मिल चुकी थी पियरो द विंची एक दीवानी वकील के रूप में कार्य करता था। पियरे , को कटरीना के अलावा चार पत्नियाँ और थी
दहेज प्रथा के अनुसार जो लड़की या उसका परिवार दहेज की रकम की व्यवस्था नहीं कर पाता था, उसे अविवाहित ही रहना पड़ता था, इसी के कारण कटरीना को भी अविवाहित ही रहना पड़ा कटरीना ने पुत्र को लालन पालन के लिए पियरे को दे दिया और एक गरीब युवक से विवाह कर लिया|

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  • लियोनारदो ने बचपन में किये ऐसे प्रश्न—

  1. रेत के ढेर की ऊँचाई से उसकी चौड़ाई दोगुनी क्यों होती है?
  2. मृत शरीर पानी में क्यों तैरता है?
  3. चिडि़याँ किस प्रकार उड़ान भरती हैं?
  4. यदि मुझे उड़नेवाली मशीन बनानी हो तो कैसे बनाऊँ?

  • लेओनार्दो के बचपन की प्रतिभाशिलता

लियोनारदो द विंची(Leonardo Da Vinci) बचपन मे गत्ते के विभिन्न आकार के टुकड़े को हवा में फेक दिया करते थे । और उनके गिरने की विभिन्न मुद्राओं का चित्रण बड़ी तेजी के साथ करने का अभ्यास रोज किया करते थे। इस तरह लियोनारदो ने न सिर्फ अपनी चित्रकला में गति ला पाये बल्कि उन्होंने अपने हाथों व आँखों के बीच बहुत अच्छा समन्वय विकसित कर लिया।


  • पादरियों से परहेज:

एक दिन लियोनारदो के स्टूडियो मे एक पादरी आया और स्टूडियो के दिवाल पर लगे चित्र पर पानी डालने लगा। इस पर अचंभित होकर लियोनार्डो ने पूछा, ‘आप ये क्या कर रहे हैं? ‘प्रिय पुत्र मैं इन चित्रों को इस पवित्र जल से पवित्र कर रहा हूँ।’ पादरी ने ऐसा कहा। लियोनार्डो तब क्रोध से भर गया । उसने कहा, ‘इन चित्रों को किसी पवित्रता की आव्यसकता नही यह पवित्र हैं।’और फिर खिसियाए हुए पादरी के ऊपर एक बालटी पानी फेक दिया और कहा, ‘चले जाओ वापस मत आना

लियोनार्डो अकसर पक्षियों के पिंजरों को खरीद लेते और बंद पछियो को खुले आसमान में छोड़़ देते।

  • व्यक्तिगत जीवन :


लियोनार्डो अपने आप में एक महान व्यक्ति थे। उनका चिंतन अनोखा था और विचार दृढ़ होते थे। वे जमाने से हटकर सोचते थे। उनकी सोच व सासमझ बिल्कुल अलग थी। उन्होंने जीवन पर्यंत कभी विवाह नहीं किया। वे अपने जीवन के उनतालीस वर्ष अकेले ही रहे । फिर उन्होंने एक बच्चे को गोद लिया।
जजिसकी उम्र दस वर्ष थी और लियोनारदो ने जिस लड़के को गोद लिया वह अनाथ एवं गरीब था और कपडे के नाम पर उसके तन पर चिथरे थे। उस लड़के का रंग काला एवं बाल घुँघरैले थे उस बालक का नाम गियाकामो था। लियोनार्डो के द्वारा उस लड़के को सिलाई नाम मिला जिसका मतलब —छोटा शैतान होता है।
लियोनार्डो उस बालक को बहुत प्यार करता था। लियोनारदो ने उस लड़के को हर तरह की सुविधाए दिया जैसे अच्छा भोजन,अच्छे कपड़े लेकिन वह लड़का बिगड़ता चला गया। लियोनार्डो सीलाई को एक कलाकार बनाना चाहता था, किंतु लड़के ने कला में रुचि नहीं लिया।कोई और कार्य सिखाना भी व्यर्थ रहा।
धीरे-धीरे वह लड़का बिगड़ता चला गया। उसने चोरी भी करना शुरू कर दिया। लियोनार्डो का उससे अकसर लड़ाइ और झगड़ा होता था।
अंततः लियोनार्डो ने उस लड़के से परेशान होकर कहा मुझे चैन से रहने दे।बाद में उस लड़के को लियोनारदो ने‘लिटिल डेविल’ कहा।
लियोनार्डो ने मरने से पहले अपनी सम्पति का आधा हिस्सा लड़के को दे दिया
परंतु पिता पियरो ने मरने से पूर्व कोई संपत्ति नहीं छोड़ी।

Leonardo Da Vinci Paintings

  • कालजयी रचना ‘द लास्ट सुपर (Leonardo Da Vinci The Last Supper):

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वर्ष 1495 में मिलान के राजा लुडविको को एक खयाल आया कि मठ मे भोजन करने वाले स्थान के दिवाल पर एक पेंटिंग बनवाई जाय जो अंतिम भोजन’ (रात्रि का) से संबंधित हो
इसे म्युरल कहा जाता है इस पेंटिंग को बनाने का काम लियोनारदो को मिला
जीसस ने ऐसा ही भोजन अपने अंतिम दिन किया था उस दिन वो अपने के शिष्यों के साथ भोजन पर बैठे थे महत्त्वपूर्ण बात तो ये है की उस रात उन्हे पता था की उनका एक शिष्य उन्ह धोखा देने वाला है उसके अगले ही दिन जीसस को सूली पर चढ़ा दिया गया
लियोनार्डो ने लगभग दो वर्षों में इस चित्र को तैयार कर लिया,जो लगभग 4.6 मीटर ऊँची, 8.8 मीटर लंबी तथा जमीन से 2 मीटर की ऊँचाई से प्रारंभ होती थी।किन्तु इसमे जीसस और उनके ग्यारह शिष्य ही बने थे । अभी जूडास नामाक शिष्य का बनना बाकी था। लियोनार्डो की
बाइबिल में लिखा है, जूडास एक विश्वासघाती व्यक्ति था। लियोनार्डो चित्र से जूडास के विश्वासघाती दृश्य को स्पष्ट दर्शाना चाहता ।
1497 का पूरा वर्ष जुडास जैसे चरित्र वाले पुरुष को खोजने बीत गया । पर कुछ महीनों बाद लियोनार्डो की उपयुक्त चरित्र की तलाश पूरी हुई। जूडास का पूरा चरित्र चित्र में उभर कर सामने आ गया । लियोनार्डो ने अपनी कालजयी रचना ‘अंतिम रात्रि का भोजन’ को सम्पूर्ण कर लिया

विकिपीडिया पर पढ़े -द लास्ट सपर


  • लेयोनार्दो की एक और अमर रचना मोनालिसा ( Leonardo Da Vinci the MonaLisa):


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सन् 1505 में लेओनार्दो ने मोनालिसा के पेंटिंग की रचना की। मोनालिसा कौन थी, इस बारे में अलग-अलग कलाकारो अलग -अलग मत है । कुछ कलाकारों का मानना है कि मोनालिसा एक व्यापारी फ्रांसिस्को डेल गियोकोंडो की पत्नी थी। सायद इसलिये क्योंकि मोनालिसा को ‘ला गियोकोंडो’ भी कहा जाता है पर कुछ लोगो का मानना है की मोनालिसा एक वैश्या थी।
पर इसका भी कोई साक्ष्य नहीं मिलता है। अनेक लोगो का तो यहाँ तक मानना है की यह तस्वीर लियोनार्दो की माँ कटरीना की है।
विश्व की सर्वश्रेष्ठ कृति होने का श्रेय मोनालिसा के मुसकान को दिया जाता। मोनालिसा की मुस्कान अत्यंत आकर्षक एवं मोहक है।
मुस्कान इसलिए इतना क्रन्तिकारी हो गया क्योंकि उन दिनों कोई भी अपनी तस्वीर गंभीर मुद्रा में ही बनवाता था।
यह मान्यता प्रचलित हैं कि—मोनालिसा एक अत्यंत गंभीर व रोनी सूरत वाली युवती थी और उसे हँसान एक चुनौतीपूर्ण कार्य था।पर लियोनार्डो ने मोनालिसा चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए अनेक संगीतज्ञों, जोकरों की मदद लेनी पड़ी थीं।जोकरो के द्वारा मोनालिसा को हँसाते वक्त ही लेओनार्दो तस्वीर बनाता था।
इसके बारे में एक बात की कही जाती है मोनालिसा के मुख में एक भी दांत नहीं थे और वह हमेसा नकली दांत लगाये रहती थी।जोकर के हँसाने पर मोनालिसा मुसकराकर रह जाती थी। शायद इसीलिए उसकी मुसकान अनोखी है।
इतना ही नहीं कहा तो यहाँ तक जाता है कि मोनालिसा कोई और नही लेओनार्दो ही है ।कहा जाता है लेओनद्रो ने स्त्री के जैसे खुद को तैयार करके शीशे में देखकर खुद की तस्वीर बनाई थी।
अनुमान है उस वक्त कलाकार पैसे लेकर तस्वीर बनाते है यह तस्वीर भी उसी तरह बनाई गई होगी
यह चित्र 77 सेंटीमीटर लंबा और 53 सेंटीमीटर चौड़ा था। लियोनार्डो ने इस तस्वीर को बनाने के लिए स्मोकी फुमोती तकनीक का प्रयोग किया था।
बाद में इस पेंटिंग को फ्रांस के राजा लुई बारहवें ने खरीद लिया था। इसके साथ ही यह मोनालिसा भव्य राजमहलों की शोभा बन गई।

विकिपीडिया पर पढ़े - द मोनालिसा

मृत्यु:

लेओनार्दो द विंची(Leonardo Da Vinci ) 20 मई, 1519 को इस दुनिया को छोड़ के चले गए। लोगों का कहना है कि मृत्यु के वक्त फ्रांस का राजा उनके साथ ही था और लियोनार्दो ने अपनी आखरी सांस राजा के बाहों में ली ।
लेकिन अनेक लोगो ने इसका विरोध करते हुए खंडन किया और कहा की राजा उस वक्त लेओनार्दो से मिलो दूर था ।
लियोनार्डो के शरीर को दफन होने के लिए अपने देश की जमीन भी नसीब नहीं हुई। परंतु इस महान् चित्रकार के सम्मान में इनके शरीर को फ्रेंच चैपल में दफनाया गया।

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यह भी पढ़े : कला क्या है?


Sunday, 22 September 2019

Top Best Motivational Poem in Hindi ( हिन्दी कविता )

Top Best Motivational Poem in Hindi ( हिन्दी कविता )

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Top Best Motivational Poem in Hindi

पिता की दी सीखो का करले ध्यान
निर्णय लेना भी सिख जाएगा
पिता तेरे लिए वो जमीं है
जिसपर हमेशा तु खुद को खड़ा पाएगा

आज नही तो कल ये तु जान जाएगा
पिता के सिख से बढ़कर कोई सिख नही होती
पिता के होने से बढ़कर कोई तक़दीर नही होती
पिता के न होने से बढ़कर कोई पीर नही होती

माँ के दी सीखो का करले ध्यान
खुद पर विश्वास करना तु सिख जाएगा
माँ तो तेरे लिए वो दरवाजा है
जिसे तु हमेशा खुला पाएगा

आज नही तो कल तु ये जान जाएगा
माँ से बढ़कर कोई चीज नही होती
माँ से अच्छी कोई तस्वीर नही होती
माँ के होने से बड़कर कोई तकदीर नही होती

कोहरा चाहे कितना भी घना हो
सूरज के गर्मी से हट जाता है
अंधेरा चाहे कितना भी घना हो
सुबह के रोसनी के आगे न टिक पाता है  

भ्रम चाहे कितना भी बड़ा हो
खुद पर विश्वास से मिट जाएगा
अज्ञान चाहे कितना भी ज्यादा हो
गुरु के ज्ञान के आगे न टिक पायेगा

तु खुद को पहचान जाएगा
आज नही तो कल तु ये मान जाएगा
आदत चाहे कितनी भी बुरी हो
दृढ़ विश्वास से छुट जाएगा
रात चाहे कितनी भी लम्बी हो
कल सवेरा फिर आएगा
आज नही तो कल तु ये मान जाएगा
तु खुद को पहचान जाएगा

MORE   -SELF RESPECT POEM IN HINDI 




















Thursday, 19 September 2019

Art in Hindi ( कला )

Art in Hindi ( कला )

"कला  ईश्वर से जुड़ने का सबसे सीधा और सरल मार्ग है"

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 Art in Hindi

  • कला की परिभाषा (Definition of Art in Hindi)

आप सभी को नमस्कार,यह लेख सम्पूर्ण रूप से कला को समर्पित है 
जिसमे आज हम नटराज की देन कला से अर्जित ज्ञान की चर्चा करेंगे | 
वास्तव में कला की परिभाषा दे पाना किसी के लिए भी आसान नहीं क्यूंकि कही न कही यह हमारे भीतर से आती है कला की परिभाषा देना  आसान  नहीं है किन्तु  कुछ विद्वानों कि माने तो  

  • वह सभी क्रियाएं जिनको करने में कौशल की आवश्यकता होती है कला कहलाती है
  • मन के अंदर की दुनिया का प्रस्तुतीकरण कला कहलाता है
  • सामान्यत: कला हमारे भीतर की हुनर तथा प्रतिभा को प्रदर्शित करती है  
मन के अंदर की दुनिया का प्रस्तुतीकरण कला कहलाता है 
अत: किसी प्रकार की रचना करने कि क्रिया को  कला कहते है  दोस्तों यही नहीं कला इस संसार में विभिन्न रूपों में, विभिन्न 
माध्यमों से  प्रकट होती है उदाहरण स्वरूप 
(1) किसी  प्रेमी का किसी प्रेमिका के सामने अपने प्रेम भाव को प्रकट करना
(2) किसी वक्ता के द्वारा अपनी भावनाओं का भाषा के माध्यम से प्रस्तुतीकरण करना इसे भाषा कला कहते हैं 
(3) किसी गूंगे के द्वारा अपने भाव को किसी के सामने अपने अंगों का उपयोग करके इशारों के माध्यम से प्रकट करना भी एक कला है
(4) किसी कवि के द्वारा कविता के माध्यम से अपने अंदर कि भावनाओ को व्यक्त करना भी एक कला

(५) किसी संगीतकार के द्वारा किसी संगीत के माध्यम से अपने अंदर की भावनाओ को प्रकट करना भी एक कला है

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