Friday, 8 January 2021

ब्रिटिश कालीन कर व्यवस्था एवं राष्ट्रवाद | Revenue System In India

भारत एक कृषि प्रधान देश है  | कृषि प्रारम्भ से ही भारत का प्रमुख व्यवसाय रहा है  |भारत की लगभग 80 % आबादी कृषि एवं कृषि सम्बन्धित उद्योगों पर निर्भर रही है | इसीलिए यह कहना गलत नही होगा कि भू राजस्व भारतीय प्रशासनीय आय का प्रमुख स्त्रोत रहा है | यही नही भू राजस्व भारतीय प्रशासन का एक अभिन्न अंग भी रहा है | प्राचीन काल में खेतो  के निकट बसने वाले समूह को ने ग्रामों का रूप ले लिया | प्रारम्भिक समय में प्रत्येक व्यक्ति अपने रोजमरा की आवश्कताओ की पूर्ति  स्वयं किया करते थे | किन्तु कालांतर में गावो में सहकारी समूह  के  विकास  ने अनेक ग्रामीण  कृषको के अलावा उनके सहायक करने वाले व्यक्ति  (जैसे बुनकर ,खाती, चमार लोहार,कुम्हार ,तेली) समूह भी हुआ करते थे | 



प्राचीन काल में इस व्यवस्था से ग्रामीणों एवं कृषको की आर्थिक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ा | क्योकि सामंतवादी व्यवस्था , शासकवर्ग एवं भूराजस्व प्रणाली का निर्धारण तथा वसूली न्याय उचित था | प्राकृतिक प्रकोप के उपजी आकाल  की समस्या  से  किसानो को मुक्ति दिलाने के लिए  भूराजस्व से मुक्त का प्रावधान भी देखने को मिलता है | किन्तु जब ब्रिटिश भारत व्यापार करने के उद्देश्य से उन्होंने तकरीबन १०० वर्षो तक भारत में  व्यापार किए उसके पश्चात् उन्होंने भारत में अपना साम्राज्य स्थापित करना शुरू किया |उन्होंने बंगाल , मद्रास ,बम्बई जैसे प्रान्तों पर विजय स्थापित की |जिसे ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्र कहा जाता था | जहाँ उन्होंने प्रशासन के व्यवस्था को विस्तार देते हुए | आय के एक अन्य स्त्रोत की तलाश की | जिसे भू – राजस्व के रूप में हम जानते है | 

ब्रिटिश काल में अंग्रेजी हुकुमत के द्वारा कई भू राजस्व की नीति चलाई गई | जिसमे रैयतवानी , महालवाणी , स्थायाई बंदोबस्त प्रमुख रहे है | क्योकि अंग्रेजी हुकुमत को भू राजस्व का अच्छा ज्ञान प्राप्त नही था | यही वजह रहा की भू राजस्व की नीतियों की खामियों के परिणाम स्वरूप समाज में दो स्तरीय शोषण को बढ़ावा मिला एक तरफ इस व्यवस्था में किसानो की हालात पतली होती चली गई तो समाज के धनी , सम्पन्न वर्ग कहे जाने वाले जमीदार वर्ग का शोषण देखने को मिला |

इस दो स्तरीय शोषण के एक वर्ग और भी था जिसे समाज के साहूकार के रूप में जानते है जिसने मनमाना किसानो का शोषण किया |इस आता ताई (शोषण , अधीनता , दरिद्रता , भूमि हीनता ,  आकाल , अत्यधिक कर वसूली , ) व्यवस्था के परिणाम स्वरूप देश मध्य जगह जगह ( तेभागा , तेलगाना , संथाल प्रमुख रहे ) पर राष्ट्रवाद की पनिधि हुई | अंततः अंग्रेजी हुकुमत को अपने दोषपूर्ण नीति में सुधार करते रियायते देनी पड़ी , या तो बदलाव करने पड़े अथवा समाप्त कर देना  पड़ा |      

भारत एक कृषि प्रधान देश है  | कृषि प्रारम्भ से ही भारत का प्रमुख व्यवसाय रहा है  | भारत की लगभग 80 % आबादी कृषि एवं कृषि सम्बन्धित उद्योगों पर निर्भर रही है | इसीलिए यह कहना गलत नही होगा कि भू राजस्व भारतीय प्रशासनीय आय का प्रमुख स्त्रोत रहा है | यही नही भू राजस्व भारतीय प्रशासन का एक अभिन्न अंग भी रहा है | प्रसिद्द विद्वान रोमेश दत्त के शब्दों में “ समस्त  सरकारों की प्रशासनिक सरचना भू  राजस्व  के निर्धारण एवं उसकी वसूली की प्रक्रिया से अभिन्तं सम्बन्धित रही है इसलिए इस देश के प्रशासनिक तथा भूराजस्व  या वित्तीय इतिहास के निर्माण में भूराजस्व प्रणाली तथा इसके क्रियान्वयन का सर्वोपरि महत्व रहा है |इसके अतिरिक्त अवधि में (19वी. शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ) कृषि भारत में सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक प्रवृतिय बनी रही है |तथा कृषि और कृषक के भाग्य का आधार भूराजस्व की मात्रा तथा इसका निर्धारण एवं वसूली रहा है |”

भारत में कृषि तथा कृषक की आर्थिक दशा के आधार पर ही  प्रशासन की  कुशलता मानी जाती रही है | और इस दशा का आधार उचित मात्रा भूराजस्व प्रणाली को लगाया जाना रहा है | जो  प्रशासन के उदार  तथा लोक कल्याणकारी के चरित्र को प्रदर्शित करता रहा है | जब भूराजस्व की मात्रा में अत्यधिक कर की वृद्धि एवं  वसूली में कठोरता की  नीति प्रशासन की क्रूरता  एवं  अत्याचार का पर्याय माना जाता रहा है |  इसलिए  न्याय पर आधारित उचित  भूराजस्व प्रणाली का निर्धारण एव वसूली में उदारता को होना   अत्यधिक आवश्यक  है | कठोरता  एव क्रूरता  के आधार पर भूराजस्व की गई  वसूली कृषको  की दयनीय दशा के कारण हमेशा से बनते रहे  है | जिसके परिदृश्य  ब्रिटिश कालीन कर व्यवस्था में देखने को मिलते   रहे है | जिसका परिणाम यह देखने को मिला की  ब्रिटिश काल में कृषको की दशा दयनीय होती चली गई | ऐसा नही की भारत में ब्रिटिश कालीन भू – राजस्व व्यवस्था के पूर्व  भू – राज्य से सम्बन्धित प्रणाली विदमान नही थी |भारत में कई प्रकार की कर प्रणाली प्रचलित थी | 

भू राजस्व व्यवस्था के स्वरूप -  

एक ऐसी भूमि व्यवस्था थी जिसमें सीधे बंदोबस्त किया गया इस प्रणाली में जमीदार नंबरदार या तालुके दा जैसा कोई भी बिचोलिया नहीं था जो किसान और सरकार के बीच मध्यस्थता करता रहता और सरकार के बीच सीधा संपर्क संबंध था रैयत को भूमि का स्वामी माना गया तथा उनका अधिकार अनुवांशिक बनाया जा रही हो अपनी भूमि को बेचने या गिरवी रखने का अधिकार दिया जाए इस व्यवस्था के साथ बंदोबस्त कोई स्थाई स्थाई नहीं बनाया गया तथा इसे इसी रूप नियमित रूप से 20 से 30 वर्ष के बाद संशोधित किया गया जाता था और आमतौर से राजस्व की मांग को बढ़ा दिया जाता था प्रत्येक गांव की भूमि का सर्वेक्षण हुआ और भूमि संबंधी दस्तावेज तैयार हुए दिन जिसमें प्रत्येक रैयत की भूमि का विवरण अंकित है इस अभिलेख में रजत का नाम पता उगाई गई फसलों का विवरण प्रति वर्ष के लिए लिखा जाता था सर्वेक्षण के समय भूमि की उत्पादकता के फसलों की दृष्टि में रखा गया था कुछ वर्षों की पैदावार को दृष्टि में रखते हुए 1 वर्ष का औसत निकाला गया और इस उत्पादन का 45% भाग भू राजस्व के रूप में लेने की बात तय की गई और उपज को नगद राशि में बदलने के लिए स्थानीय बाजार भाव को दृष्टि में रखा गया अनेक वर्षों के अध्ययन और विचार विमर्श के बाद लागू की गई थी इसके द्वारा यह कहा गया कि महालत वा गांव की समस्त भूमि का बंदोबस्त किया जाएगा और सामान्य एक ही व्यक्ति के नाम से उस गांव की भूमि व्यवस्था लागू होगी जिसके साथ ही भागीदारों के हितों की भी रक्षा की गई जिसके साथ अलग से बंद बस की नहीं किया गया यद्यपि भू राजस्व की अदायगी के लिए सदा मालगुजार की जिम्मेदार था किंतु सा भागीदार यदि आवश्यक समझे तो अपने हिस्सों को अलग कर आ सकता था सदर मालगुजार के संदर्भ में निर्णय लिया लिया करता था जिला कलेक्टर की उपस्थिति में ग्राम समुदाय द्वारा किया जाने की व्यवस्था थी |
1.1 भारत मे ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार से पूर्व की भू राजस्व व्यवस्था  :

कृषि भारत का प्रारम्भ से ही मुख्य व्यवसाय रहा है | प्राचीन काल में खेतो  के निकट बसने वाले समूह को ने ग्रामों का रूप ले लिया | प्रारम्भिक समय में प्रत्येक व्यक्ति अपने रोजमरा की आवश्कताओ की पूर्ति  स्वयं किया करते थे | किन्तु कालांतर में गावो में सहकारी समूह  के  विकास  ने अनेक ग्रामीण  कृषको के अलावा उनके सहायक करने वाले व्यक्ति  (जैसे बुनकर ,खाती, चमार लोहार,कुम्हार ,तेली) समूह भी हुआ करते थे | प्राचीन काल में इस व्यवस्था से ग्रामीणों एवं कृषको की आर्थिक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ा | क्योकि सामंतवादी व्यवस्था , शासकवर्ग एवं भूराजस्व प्रणाली का निर्धारण तथा वसूली न्याय उचित था | प्राकृतिक प्रकोप के उपजी आकाल  की समस्या  से  किसानो को मुक्ति दिलाने के लिए  भूराजस्व से मुक्त का प्रावधान भी देखने को मिलता है | 

अधिकांस भाग सिचाई परिवहन विकसित बीज  खाद आदि के स्थानों का विकाश करने हेतु खर्च  करने के लिए धन उपलब्ध करने के लिए प्रयत्न शील रहते थे प्राचीनकाल में भारतीय भू राजस्व प्रशासन कृषक  को तथा ग्राम समुदाई के लिए कल्याणकारी था जो तत्कालीन उदार प्रशासन का दोतक है | अंग्रेज भारत में व्यापारी बनकर अपने आर्थिक हितों की पूर्ति के  लिए आया | उन्होंने भारत का जमकर शोषण किया जिससे भारत निरंतर निर्धन होता गया उस समय भारत की परंपरागत आर्थिक व्यवस्था को नष्ट कर दिया के आगमन के समय कि भारत की आर्थिक दिशा के संबंध में चोपड़ा पूरी वह दास ने लिखा है कुल मिलाकर भारत की आर्थिक स्थिति अंग्रेजों के के भारत पर विजय प्राप्त करने के समय तक का संतुलित थी । यह संतुलन कृषि और उद्योग के बीच था भारत के आर्थिक ढांचे में में हुए परिवर्तन स्वभाविक नाथा अपितु थोपा गया था पंडित नेहरू के अनुसार भारत विश्व का बाजार का एक अंग नहीं बन सका पर वह अंग्रेजी ढांचे का एक उपनिवेश इक एवं सांस्कृतिक अंग बन गया |

1.2  ब्रिटिशकालीन राजव्यवस्था -

ब्रिटिशकालीन राजव्यवस्था के समय में अंग्रेजों हुकुमत के नुमाइन्दी को भू राजस्व प्रणाली के प्रबन्ध का को खास ज्ञान नही था | जिसके उदाहरण क्लाइव के भू राजस्व की नीति में देखने को मिलते है | क्लाइव के भू राजस्व को एकत्र करने की पुरानी नीति थी | जिसको उन्होंने आगे भी जारी रखा | जिसके लिए   बंगाल के डिप्टी दीवान को उत्तरदायि बनाया गया था | यही वजह है कि हेस्टिंग ने इस भू राजस्व की व्यवस्था की खामिया में विचार  करते हुए  | भू राजस्व के  वसूली  के अधिकार को  1772 में बंगाल समाप्त करते हुए , आपस ले लिया |

1.2.1  वारन हेस्टिंग की भू राजस्व नीति-

क्योकि बंगाल के दीवानी के उत्तरदायित्व का भार  अब कंपनी शासन पर आ गया | इसलिए वारन हेस्टिंग भू राजस्व को  नियमित करने के उद्देश्य से  पंचवर्षीय बंदोबस्त व्यवस्था को लागू किया |

1.2.1.1. पंचवर्षीय व्यवस्था-

इस पंचवर्षीय बंदोबस्त व्यवस्था की प्रमुख विशेषता यह थी कि इसमें  भूमि की बोली लगाई जाती थी | सबसे ऊंची बोली लगाने वाले व्यक्ति को  5 वर्ष के लिए भूमि ठेके दिया जाता था | साधारणत यह कार्य ग्राम के जमीदार वर्ग के द्वारा किया जाता क्योकि उनकी आर्थिक स्थिति समाज में काफी अच्छी थी यही वजह है कि जमीदारों को पंचवर्षीय बंदोबस्त व्यवस्था में प्राथमिकता मिलती थी | जमीदार द्वारा के भूमि को भूमिहीनों/कामगारों  को  पट्टा दिया जाता था | जिसमें तहत लगान की राशि पूर्व निर्धारित होती थी | लगान की राशि को जिले स्तर में कलेक्टर /दीवान की सहायता से वसूली जाता था | इस उद्देश्य के पूर्ति हेतु प्रत्येक जिले में दीवानी अदालतों की स्थापना की गई थी | इसके अलावा लगान व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए दो राजस्व नियंत्रण परिषद की स्थापना हुई | भू राजस्व प्रशासन पर नियंत्रण रखने वाली  गवर्नर व उसकी परिषद  को  राजस्व मंडल कहा जाता था | गवर्नर की सहायता के लिए राय नारायण नामक भारतीय अधिकारी नियुक्त किये जाते थे |

समीक्षा-

पंचवर्षीय बंदोबस्त की व्यवस्था के अंतगर्त दो स्तर शोषण देखने को मिलता है | प्रथम जमीदार वर्ग के लोग भुमि की ऊंची बोली लगाकर भूमि का ठेका तो ले लेते थे किन्तु  भुमि का लगान जमा नहीं कर पाते थे | जिसके परिणाम स्वरूप बहुत धनराशी बाकि रह जाती थी | दुसरे लगान की राशि वसूलने  हेतु किसानों का अत्यधिक शोषण किया जाता था | जिसके किसानो की दशा और भी दयनीय होती चली गई | इस प्रकार पंचवर्षीय बंदोबस्त की व्यवस्था किसानों तथा कंपनी दोनों के लिए अत्यधिक हानिकारक साबित हुई | वारन हेस्टिंग ने पूर्ववर्ती व्यवस्था को समाप्त कर  पंचवर्षीय व्यवस्था लागू की किंतु किसानों एवं जमीदारों की गिरती दशा के कारण यह योजना भी विफल साबित हुई |जिसका कारण लगान की अत्यधिक वसूली , जिसने  कृषको  की दशा अत्यधिक दयनीय बना दिया | जिससे सरकार और खेती करने वालों कृषक के आपसी  संबंध दरार आ गई  और जमीदारों तथा काश्तकारों के बीच के संबंध पूरी तरह खत्म हो गए | कहने का तात्पर्य यह है कि बंगाल में राजस्व प्रणाली का गलत तरीको से क्रियांवयन किया गया | प्राचीन भूस्वामी परिवारों को नष्ट किया गया तथा कृषि को पर गंभीर अत्याचार किए गए | जिसके परिणाम स्वरूप   किसानों के पास तन ढकने के लिए कपड़ा के भी मौताज हो गए | इसलिए खेती छोड़ कर चले गए | जिससे खेती करने वाले कमी एवं अकाल पड गया | जिसकी वजह से भारत में कंपनी के अधिकृत क्षेत्र के एक तिहाई भाग को जंगली जानवर संरक्षित कर  दिया गया |

Wednesday, 30 December 2020

रविंद्रनाथ टैगोर की जीवनी हिंदी | Rabindranath Tagore In Hindi

December 30, 2020 0

नमस्कार मित्रों देवकलासंसार में आपका स्वागत है , आपने अब तक कई महान व्यक्तित्व के जीवन परिचय पढ़े होगे , जिन्होंने देश के लिए , समाज के उद्धार के लिए अनगिनत कार्य किये होगे आज हम  आपको ऐसे ही एक शख्स के बारे में बताने वाले है , 

जो एक महान लेखक , कहानीकार , उपन्यासकार , गीतकार ,साहित्य प्रेमी थे , इन्होने न केवल साहित्य के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण  योगदान दिया है बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आजाव उठाई है तथापि  भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के  सक्रिय कार्यकर्त्ता भी रहे है | 

हम बात करने वाले है रविंद्रनाथ टैगोर के बारे , कुछ याद तो जरुर आ रहा  होगा , आपने कई स्कूलों , गणतंत्र दिवस , सिनेमा घरो एवं टेलीविजन पर इसे जरुर सूना होगा ,हाँ आप ठीक सोच रहे है हम बात कर रहे है  "जन गण मन गण " की  हाँ आपने ठीक पहचाना  रविंद्रनाथ टैगोर   द्वारा रचित  यह रचना   भारत देश का राष्ट्रीयगान बना  , यह एकलौते मात्र ऐसे गैरयूरोपीय  शख्स  एवं एशिया के पहले शख्स थे जिन्हें सर्वप्रथम  गीतांजलि  नामक काव्यसंग्रह/ कविता संग्रह के लिए   नोबोल पुरस्कार से सम्मानित किया गया |

rabindranath tagore in hindi

भारत की धरती ने  अनेक वीर सपूतो , कवियो , साहित्य प्रेमियों , कहानीकारो ,गीतकार , उपन्यासकार , दार्शनिको को जन्म दिया  जिसकी श्रृखला काफी लम्बी है , नाम  गिनना यदि शुरू किया गया तो  सम्भवतः जुबान थक जाए , उन्ही महान साहित्यकार ,काव्यप्रेमी , दार्शनिक में से एक रविंद्रनाथ टैगोर थे , जिन्होंने अपनी जीवन के अमूल पल भारत माता की सेवा में न केवल  समर्पित किये बल्कि वे  भारतीय स्वतत्रता संग्राम के सक्रीय नेता भी रहे |

इनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इसको नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया यही नही  यह भारत के प्रथम ऐसे नागरिक थे ,जिनको  यह पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ | अपने आप में किसी भी भारतीय के लिए  उपलब्धि  थी | इस  प्रकार , ये  प्रथम भारतीय नागरिक बने जिन्होंने एशिया क्षेत्र से यह पुरस्कार प्राप्त किया तथापि  इसके साथ ही  ये  प्रथम गैर यूपोरिय महाद्धीप के नोबल पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता भी बन गए | 

रविंद्रनाथ टैगोर का प्रारम्भिक जीवन  - 

दिनांक  7 मई  वर्ष 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी  में  जन्मे रविंद्रनाथ टैगोर  एक महान कवि , गीतकार  , उपन्यासकार , दार्शनिक थे | इनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर तथा  इनकी  माता  का नाम  शारदा देवी था | 

भारतीय इतिहास में लोग इन्हें गुरुदेव के नाम से भी जानते है | यह अपने पिता के सबसे छोटे पुत्र थे तथापि यह ब्रम्ह समाज के प्रमुख नेताओं में से एक थे , जो 19 शताब्दी के इतिहास का प्रमुख सम्प्रदाय बना | जिसने हिन्दू धर्म में व्याप्त कुरीतियों का पर प्रश्न भी लगाया जिसके माध्यम से इन्होने समाज में व्याप्त कुरीतियों  पर प्रहार करने का कार्य किया |


शैक्षणिक जीवन  -

रविंद्रनाथ टैगोर  की प्रारम्भिक शिक्षा सेट जूनियर स्कूल से हुई तथापि आगे की शिक्षा के लिए मात्र 17 वर्ष की आयु में यह इंग्लैण्ड चले गए , जहाँ से इन्होने कानून की शिक्षा प्राप्त की किन्तु शिक्षा का कार्य बीच में छोड़कर वापस देश लौट आये |


वैवाहिक जीवन   - 

22 वर्ष की अवस्था में  रविंद्रनाथ टैगोर  का विवाह मृणालिनी देवी नामक एक कन्या से कर दिया गया  , जिनसे इनको 5 संतानों की प्राप्ति हुई थी | मृणालिनी देवी सरल एवं सुबोध कन्या थे जिन्होंने सच्चे अर्थो में रविंद्रनाथ टैगोर   का जीवन पर्यन्त  साथ दिया |


साहित्य में योगदान  - 

वैसे देखा जाए तो , रविंद्रनाथ टैगोर  बहुमुखी प्रतिभा के धनि व्यक्ति थे , इन्होने साहित्य के क्षेत्र में  विविध कविताएँ ,आत्मकथा , उपन्यास , संगीता , निबन्ध , लघु कथाएँ , कहानीयां  लिख कर अपना महत्वपूर्ण योगदान किया ,जिससे  साहित्य के क्षेत्र में श्री वृद्धि हुई | 

उन्होंने अपने जीवनकाल में  तकरीबन  2230 गीतों का रचना करने का कार्य किया |इसके अलावा इन्होने ढ़ेरो  कविताएँ ,आत्मकथा , उपन्यास , संगीता , निबन्ध , लघु कथाएँ , कहानीयां  जो निम्नवत  -


उपन्यास  

कहानी संग्रह

नाटक

कविता 

नष्टनीड़

छेलेबेला

विसर्जन

गीतांजलि

घरे बाइरे

संस्मरण

अचलायतन

सोनार तरी

गोरा 

जीवनस्मृति


मुक्तधारा 

 


पदावली


योगायोग 

गल्पगुच्छ

रक्तकरवी

भानुसिंह ठाकुरेर

चोखेर बाली

रूस के पत्र 

राजा

मानसी



वाल्मीकि प्रतिभा

वलाका



डाकघर

गीतिमाल्य


रविंद्रनाथ टैगोर की प्रमुख रचनाएं  - 


गोरा 

नई रोशनी यह स्वतन्त्रता/घर वापसी 
अनमोल भेंट/मुन्ने की वापसी  भिखारिन पिंजर 
अनाथ पाषाणीप्रेम का मूल्य 
अनाधिकार प्रवेश  कवि और कविता पत्नी का पत्र 
अपरिचिताकवि का हृदय  काबुलीवाला 
अवगुंठन 
  
संपादक

अतिथि 
अन्तिम प्यार कंचन खोया हुआ मोती 
इच्छापूर्ण/इच्छा पूर्ति गूंगीजीवित और मृत
फूल का मूल्य तोता धन की भेंट
संकट तृण का  पड़ोसिनएक छोटी पुरानी कहानी
समाज का शिकार गिन्नीी सीमान्त 
मुसलमानी की कहानी विदा एक रात 
आधी रात में पोस्टमास्टरविद्रोही 


हमे आपको बताते हुए हर्ष हो रहा है कि रविंद्रनाथ टैगोर ही , वे पहले भारतीय थे , जिनको नोबोल पुरस्कार से सम्मानित किया गया और यह ही एक मात्र ऐसे कवि भी बने , जिनकी रचनाएं भारत एवं बांग्लादेश के राष्ट्रीयगान बनी  , जो इस प्रकार है  - 


         भारत का राष्ट्रगान

जन गण मन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता


पंजाब सिंधु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंगा


बिंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंगा


तब शुभ नामें जागे तब शुभ आशीष माँगे


गाहे तब जयगाथा।


जन गण मनअधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता


जय हे जय हे जय हे जय जय जय जय हे

                                          

                       बांग्लादेश का राष्ट्रगान
 

1. बांग्ला लिपि में


আমার সোনার বাংলা

আমার সোনার বাংলা,

আমি তোমায় ভালবাসি।

চিরদিন তোমার আকাশ,

তোমার বাতাস,

আমার প্রাণে বাজায় বাঁশি।

ও মা,

ফাগুনে তোর আমের বনে,

ঘ্রাণে পাগল করে,

মরি হায়, হায় রে,

ও মা,

অঘ্রানে তোর ভরা খেতে,

আমি কি দেখেছি মধুর হাসি।

কি শোভা কি ছায়া গো,

কি স্নেহ কি মায়া গো,

কি আঁচল বিছায়েছ,

বটের মূলে,

নদীর কূলে কূলে।

মা, তোর মুখের বাণী,

আমার কানে লাগে,

সুধার মতো,

মরি হায়, হায় রে,

মা, তোর বদনখানি মলিন হলে,

আমি নয়ন জলে ভাসি।

2. हिन्दी अनुवाद

मेरा प्रिय बंगाल

मेरा सोने जैसा बंगाल,

मैं तुमसे प्यार करता हूँ.

सदैव तुम्हारा आकाश,

तुम्हारी वायु

मेरे प्राणों में बाँसुरी सी बजाती है।

ओ माँ,

वसंत में आम्रकुंज से आती सुगंध

मुझे खुशी से पागल करती है,

वाह, क्या आनंद!

ओ माँ,

आषाढ़ में पूरी तरह से फूले धान के खेत,

मैने मधुर मुस्कान को फैलते देखा है।

क्या शोभा, क्या छाया,

क्या स्नेह, क्या माया!

क्या आँचल बिछाया है

बरगद तले

नदी किनारे किनारे!

माँ, तेरे मुख की वाणी,

मेरे कानो को,

अमृत लगती है,

वाह, क्या आनंद!

मेरी माँ, यदि उदासी तुम्हारे चेहरे पर आती है,

मेरे नयन भी आँसुओं से भर आते हैं।

3. लिप्यंतरण

आमार शोनार बांग्ला

आमार शोनार बांग्ला,

आमि तोमाए भालोबाशी

चिरोदिन तोमार आकाश,

तोमार बताश,

अमार प्राने बजाए बाशी

ओ माँ,

फागुने तोर अमेर बोने

घ्राने पागल कोरे,

मोरी हए, हए रे,

ओ माँ,

ओघ्राने तोर भोरा खेते

अमी कि देखेछी मोधुर हाशी.

की शोभा, की छाया गो,

की स्नेहो, की माया गो,

की अचोल बिछाइछो,

बोतेर मूले,

नोदिर कूले कूले!

माँ, तोर मुखेर बानी

आमार काने लागे,

शुधार मोतो,

मोरी हए, हए रे,

माँ, तोर बोदोनखानी मोलीन होले,

आमि नोयन जोले भाशी.

Monday, 28 December 2020

जरूर देखें ये बेहतरीन दस फिल्में | Top 10 Hollywood Movie In Hindi

December 28, 2020 0

मित्रों ! ज्यादातर लोग अक्सर रहस्यमयी हॉलीवुड मूवी देखना पसंद करते है किन्तु वर्तमान दौर में , जब की ज्ञान का बम्बार लगा हुआ ऐसे में , हमारा ज्यादातर समय खर्च हो जाता है  और हम उन रहस्यमयी फिल्म से अनभिगन  रह जाते है । तो आज हम आपको उन 10 रहस्यमयी फिल्मो (Top 10 Hollywood Movie In Hindi) के बारे में बताने वाले,जिनसे आपको बहुत कुछ सिखने को मील सकता है , तो आइए शुरुआत करते है Best Movie List की आयरन मैंन नामक फिल्म से

 

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 Best Hollywood Movie List-

Best Hollywood Mvie list
  1. Iron Man Hollywood Movie
  2. Iron Man 2 Hollywood Movie
  3. Iron Man 3 Hollywood Movie
  4. Lucy Hollywood Movie
  5. Avengers Hollywood Movie
  6. Avengers Infinity War Hollywood Movie
  7. Avengers Endgame Hollywood Movie
  8. Avengers Hollywood Movie
  9. Life Hollywood Movie
  10. Elysium Hollywood Movie 

 

Hollywood Movie In Hindi -1

 1.  आयरन मैंन  (iron man )  -

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फिल्मआयरन मैंन (iron man)
संपादकडैन लेबेन्टाल (Dan Lebental)
निर्देशकजॉन फेवरोऊ (Jon Favreau)
निर्माताएवी अरब,केविन फेज (Avi Arad,Kevin Feige)
वितरणकर्त्ता 
पैरामाउंट पिक्चर्स कॉर्पोरेशन
बजट$140 मिलियन
भाषाइंग्लिश

 

समीक्षा  - 

निर्देशक  फेवरोऊ  जॉन के निर्देशक  वर्ष  2008  बनी  आयरन मैंन  एक हॉलीवुड मूवी है , जो  मुख्यतः दुनिया के रक्षको के भूमिका को प्रदर्शित करती है । यह फिल्म का मार्वल कॉमिक्स नामक एक अमेरिकी मैगजीन कम्पनी के मैगजीन पुस्तक पर आधारित है जिसमे टोनी स्टाक की भूमिका रॉबर्ट डॉनी जूनियर ने बखूबी अदा की है

दरअसल  इस  फिल्म में टोनी स्टाक को एक हथियार निर्माणक के रूप में प्रदर्शित किया गया , जिसकी तकनीकी सोच इतनी उत्तम किस्म  की दिखाई गई है कि आतंकवादी गिरोह का उन पर नजर आ जाता है। 

जिसके परिणामस्वरूप आतंकवादी  गिरोह के द्वारा इन्हें इस फिल्म में बंदी बना लिया  जाता है । बंदी बनाया जाने के पीछे इनके व्यापारिक सहयोगी का हाथ दिखाया गया इस फिल्म में टोनी स्टाक आतंकवादी  गिरोह के द्वारा बंदी बनाए जाते समय , आतंकवादी  गिरोह की गोली इनके  सीने में  घुस जाती  है

Iron Man Movie Trailer -

 

आतंकवादी  गिरोह  के कब्जे से निकलने के लिए  टोनी स्टाक के द्वारा एक रोबोटिक सूट तैयार किया जाता है जिसकी सहायता से वे वहाँ  से ज्यादातर आतंकवादी  गिरोह को मर के भाग निकलने में सफल होते  है । उनके भाग निकलने  के  बाद की घटना  कुछ इस प्रकार घटती  है 

टोनी स्टाक आतंकवादी  गिरोह  पर आक्रमण करते है और बंदी बनाए गए लोगो को छुडाते है । अभी कहानी ख़त्म नही हुई होती  है  कि इनके व्यापारिक सहयोगी  के द्वारा इनकी तकनीकी का नमूना चुरा लिया जाता  है  और वह भी टोनी स्टाक  की भांति ही एक रोबोटिक सूट तैयार करता है , जो दिखने में  टोनी स्टाक  की रोबोटिक सूट से कई गुना  बड़ा होता है .

अंत में टोनी स्टाक और इनके व्यापारिक सहयोगी (रोबोटिक सूट ) के मध्य युद्ध होता है जिसमे टोनी स्टाक की विजय होती  है और  प्रेस वार्ता के दौरान , वो दुनिया को बताते है कि मै ही टोनी स्टाक आयरन मैंन हूँ । यही पर फिल्म समाप्त हो जाती है

घर पर स्वादिष्ट चाऊमिन कैसे बनाये | Noodle Recipe In Hindi

December 28, 2020 0

मित्रों आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि हम  चाऊमिन बनाने की विधि पर चर्चा करने वाले ,   लोगो के मन में अक्सर ये ख्याल आता है जब भी वो किसी को चाऊमिन बनाते हुए देखते काश मै भी चाऊमिन बना पाता , लेकिन अब आपको चिंता करने की कोई जरुरत नही है क्योकि देवाकला संसार आज  पकवान बनाना सीखे की श्रृखला में चाऊमिन लेकर आया है , जिसे बनाना उतना ही आसन है जितना इसको खाना , तो चाऊमिन बनाने के विधि जान्ने से पहले यह जान लेते है कि चाऊमिन आखिर क्या है तो , शुरू करते है  चाऊमिन एक प्रसिद्ध फ़ास्ट फ़ूड है.जिसे कम समय में बनाया जा सकता है.जिसके वजह से इसे अधिकांशतः नाश्ते के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है  , तो  हम  सब चाऊमिन  बनाना सीखेगे यकीन मानिए चाऊमिन  बनाना दुनिया का सबसे आसान काम है और इसे आसानी से सीखा जा सकता है , तो शुरू करते है | चाऊमिन बनाने के लिए आवश्यक जानकारी से.

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एक नजर -
भोजन प्रकार -शाकाहारी
कितने लोगो के लिए  -2 लोग
समय -10 मिनट

मुख्य सामाग्री (Noodle Recipe In Hindi) -


चाऊमिन    2- पैकिट
प्याज    2-बारीक़ कटे हुए
टमाटर    2-3 बारीक़ कटे हुए
  मिर्चा    3-4 कटे हुए
पत्ता गोभी     आधा भाग रेता हुआ
मसाला    1 -पैकिट
धनिया,सौस    सजावट के लिए
तेल    50- ग्राम
नमक    स्वादानुसार
हल्दी    1-चम्मच

कार्य विधि -


1. कार्य विधि प्रथम  -  सर्वप्रथम एक भौगेने को चूले पर चढाए फिर उसके बाद चूले को जलाए जलाने के बाद दो गिलास पानी तत्पश्चात इसमें दो पैकेट १० रूपये वाला चाऊमिन को भौगेने में डाले उसके बाद उसको 4 से 5 मिनट तक उबलने दे तथा चाऊमिन के उबल जाने के बाद उसे किसी प्लेट अथवा  थाली में निकाल ले |  

2.कार्य विधि दूसरी -  सर्वप्रथम ढाई को  चूले पर चढाए | उसमे अर्थात्  कढाई में 50 ग्राम तेल डाले | तेल के गर्म होने के बाद उसमे बारीक़ कटे  प्याज , मिर्च  को डाले और हल्का ब्राउन होने दे |
 
3.कार्य विधि तीसरी -  प्याज के हल्का ब्राउन होने बाद उसमे हल्का बारीक टमाटर, पत्ता गोभी कढ़ाई में डाले इसके बाद स्वादानुसार  नमक  , छोटे चम्मच से एक चम्मच हल्दी , छोटे चम्मच से दो चम्मच सब्जी/मीट मसाला इत्यादि को कढाई में डालकर अच्छे से  भुज ले  |

4.कार्य विधि चौथी  -  भुजने के बाद उसमे पहले से ही उबले हुए चाऊमिन को डालकर  उसे अच्छी तरह मिला ले | और उसे कुछ देर ( 2 मिनट तक )  धीमी आंच पर पकने दे |

5.कार्य विधि पाचवी  - चाऊमिन के पक जाने के बाद गैस को बंद के दे | उसके बाद चाऊमिन को किसी  प्लेट में निकल ले |चाऊमिन के सजावट के लिए उसके ऊपर बारीक़ कटे हुए धनिया डाले | सजावट की अगली कड़ी में उसके ऊपर सौस का छिडकाव करे.

देवाकलासंसर स्टाफ टीम की ओर से आप सभी को बहुत सारी शुभकामनाएं , यह  घर पर स्वादिष्ट चाऊमिन कैसे बनाये पर आधारित यह आर्टिकल आपको कैसा लगा अथवा   घर पर स्वादिष्ट चाऊमिन कैसे बनाये  के बारे में दी गई जानकारी , आपको कैसी लगी | यदि आपके मन कोई सुझाव अथवा  सलाह  , इस लेख के पढ़ने के उपरांत आए  हो , तो आप अपने सुझाव  कमेंट बॉक्स में कॉमेट करके दे सकते है | आपके सुझाव अथवा प्रतिक्रियाए हमारे लिए मायने रखते है.. ..धन्यवाद्

 

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Maggi Recipe In Hindi [ मैगी बनाने की विधि ]

December 28, 2020 0

मैगी एक प्रसिद्ध फ़ास्ट फ़ूड है.जिसे कम समय में बनाया जा सकता है.जिसके वजह से इसे अधिकांशतः नाश्ते के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है | यह एक भारतीय रेसिपीय है  , जो अत्यधिक स्वादिष्ट लगने वाला फ़ूड  माना जाता है  , तो  बने रहिए हमारे साथ आज हम मैगी बनाना सीखेगे वो भी कुछ ही पलों में , यदि आपको दुसरो को मैगी बनाते देख , ख़ुशी होती है और आप भी चाहते है , लजीज मैगी बनाना किन्तु बना नही पाते , तो  आज हम आपकी समस्या का समाधान लेकर आए है , तो शुरू शुरू करने से पहले एक नजर डाल लेते है | आवश्यक सामग्री पर  एवं बातों पर   - 

एक नजर -

भोजन प्रकार -शाकाहारी
व्यक्ति की संख्या   - 1 -2 व्यक्ति 
समय - 20 मिनट

मुख्य सामाग्री -

मैगी     2- पैकिट
प्याज    2-बारीक़ कटे हुए
टमाटर    2-3 बारीक़ कटे हुए
मिर्चा    3-4 कटे हुए
गाजर     2-3 पिस
शिलमा मिर्च    पतली लम्बी लम्बी कटे हुए
नमक    स्वादानुसार
पानी    जरूरता के अनुसार 

सब्जी समाले  - 1 रूपये वाले पाउच 


कार्य विधि -


1. कार्य विधि प्रथम  -  

मैगी बनाने के लिए  सबसे जरुरी यह बात है कि उपयुक्त बताई गई सभी सामग्रिय आपके पास उपलब्ध है , उदाहरन के तौर पर  मैगी     2- पैकिट , प्याज    2-बारीक़ कटे हुए , टमाटर    2-3 बारीक़ कटे हुए , मिर्चा    3-4 कटे हुए , गाजर     2-3 पिस , शिलमा मिर्च    पतली लम्बी लम्बी कटे हुए | यदि आपके पास यह सभी चीजे उपलब्ध  है ,  तो यकीन मानिए आप एक अच्छी मैगी बना सकते है | इसके अलावा कढ़ाई  , वर्तन , गैस यह चूले जो भी उपलब्ध हो ,क्योकि ये सबसे बुनियादी वस्तु है | मैगी बनाने के लिए सबसे पहले अपना चुला जलाए उसके बाद एक भौगेने/पैन/ कढ़ाई जो भी उपलब्ध हो उसको  चूले पर चढाए , मैगी बनाने के लिए मैगी की मात्रा को ध्यान में रखते है , भौगेने/पैन/ कढ़ाई में पानी डाले , ध्यान रखे  पानी की मात्रा आपकी अधिक नही होती चाहिए जितनी मात्र में पानी की आवश्कता हो उतना फि इस्तमाल करे ,  पानी को  कम से कम  4 से 5 मिनट तक उबलने दे |


2.कार्य विधि दूसरी

 दूसरी विधि के अंतगर्त  उसके आगे की कड़ी पर हम चर्चा करेगे  , अब आपने , जो पानी भौगेने/पैन/ कढ़ाई  में  डाल अहोगा उसमे कुछ उलाब आ रहे होगे , उबाल का मतलब पानी में बुलबुले उठ रहे होगे ,अब को बड़ी ही सावधानी से  उबाल आते  हुए पानी में  आपको  बारीक़ कटे प्याज , मिर्च , ,शिमला मिर्च ,टमाटर, गाजर एवं स्वादानुसार नमक डालने है जैसा की आपको बताया गया था कि आपको  प्यास को बारीक कटना था , मिर्चा का बारीक कटना था , गजल को बारीक काटना था , उन्ही कटे हुए सामना को इसमें डाले | , डालने क्वे  बाद उसे  अच्छी तरह मिलाए , ध्यान थोड़ी दे  मिलान के बाद उसमे सब्जी मसाले डाले , मसाला डालने के बाद उसे अच्छी तरह से मिलाए , 

3 .कार्य विधि चौथी  -  

अब आपको कढ़ाई में डाले गए सामग्री में कुछ लालिमा दिखा रही होगी ,ऐसा मसाले के घुलन के कारण देखने को मिलेगा , उसके  बाद थोड़ी देर तक अब इसे  पकने दे |

4 .कार्य विधि चौथी  -  

कुछ ही समय के बाद  , उसमे  मैग्गी तथा बचा हुआ मसाला डालकर उसे अच्छी तरह पकाए अगर आप सूप वाली मैग्गी पसंद करते है तो उसे सूप के साथ ही उतारे|


5.कार्य विधि पाचवी  -
लीजिये तैयार हो गई ,  स्वादिस्ट मैग्गी जो आपको खाने में बहुत अच्छा लगेगा  तथा जिसे लोग बहुत पसंद  भी करते है |

देवाकलासंसर स्टाफ टीम की ओर से आप सभी को बहुत सारी शुभकामनाएं , यह  Maggi Recipe In Hindi [ मैगी बनाने की विधि ]  पर आधारित यह आर्टिकल आपको कैसा लगा अथवा  Maggi Recipe In Hindi [ मैगी बनाने की विधि ] के बारे में दी गई जानकारी , आपको कैसी लगी | यदि आपके मन कोई सुझाव अथवा  सलाह  , इस लेख के पढ़ने के उपरांत आए  हो , तो आप अपने सुझाव  कमेंट बॉक्स में कॉमेट करके दे सकते है | आपके सुझाव अथवा प्रतिक्रियाए हमारे लिए मायने रखते है.. ..धन्यवाद्

 

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टेस्टी पास्ता कैसे बनायें [ Pasta Recipe In Hindi ]

December 28, 2020 0

मित्रों आज हम पास्ता बनाना सीखेगे , आपको बता दे की  पास्ता एक प्रसिद्ध फ़ास्ट फ़ूड है.जिसे कम समय में बनाया जा सकता है.जिसके वजह से इसे अधिकांशतः नाश्ते के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है ,तो शुरू से पहले नजर दल देते है ,  पास्ता बनाने के लिए  आवश्यक सामग्री पर ताकि पास्ता  बनाना हो जाए आसान - 

एक नजर :
भोजन का प्रकार - शाकाहारी
कितने लोगो के लिए - 2 लोग
समय -

 
मुख्य सामाग्री :

 पास्ता    250-ग्राम
 टमाटर     100-ग्राम 
 मिर्चा     5-6 पिस
 प्याज     2-पिस
 मैग्गी मसाला     2 -चम्मच
 हल्दी     1/2 चम्मच
 तेल     100-ग्राम
 नमक     स्वादानुसार

कार्य विधि ( pasta recipe in hindi ) :


1.कार्य विधि पहली - 


सर्वप्रथम गैस को जलाने के पश्चात पैन या भगौने को चढ़ाये फिर उसमे आधा लीटर पानी और पास्ते को डालकर 10 मिनट तक उबलने के पश्चात पास्ते को छानकर किसी बर्तन में निकाल ले.

2.कार्य विधि दूसरी -
 

सर्वप्रथम प्याज ,मिर्च ,और टमाटर को बारीक काट ले.

3.कार्य विधि तीसरी -

सर्वप्रथम गैस जलाने के पश्चात कढ़ाई को गैस पर रखे तथा इसमें 100 ग्राम तेल डालें तेल के गर्म होने पर बारीक कटे हुए प्याज ,मिर्च को कढ़ाई में डालकर ब्राउन होने तक भुने.ब्राउन कलर आ जाने पर उसमे बारीक कटे हुए टमाटर , हल्दी ,नमक ,तथा मसाले को डालकर 5 मिनट तक अच्छे से भुने.

4.कार्य विधि चौथी - 

सर्वप्रथम भुने हुए मसाले में उबले हुए पास्ते को डालकर अच्छे से मिलाएं.मिलाने के पश्चात इसे 5 मिनट तक धीमी आंच पर चलाते हुए पकाए.

5.कार्य विधि पांचवी -

पास्ते को पकाने के पश्चात एक प्लेट में निकाल ले.तथा उसे पुदीने के पत्ती से चित्रानुसार सजाकर सर्व करे.  

देवाकलासंसर स्टाफ टीम की ओर से आप सभी को बहुत सारी शुभकामनाएं , यह  टेस्टी पास्ता कैसे बनायें [ Pasta Recipe In Hindi ] पर आधारित यह आर्टिकल आपको कैसा लगा अथवा   टेस्टी पास्ता कैसे बनायें [ Pasta Recipe In Hindi ] के बारे में दी गई जानकारी , आपको कैसी लगी | यदि आपके मन कोई सुझाव अथवा  सलाह  , इस लेख के पढ़ने के उपरांत आए  हो , तो आप अपने सुझाव  कमेंट बॉक्स में कॉमेट करके दे सकते है | आपके सुझाव अथवा प्रतिक्रियाए हमारे लिए मायने रखते है.. ..धन्यवाद् 

© देवाकला संसार

देवाकला संसार टीम  उत्तर प्रदेश , भारत 

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